कुटुम्बर न्यायालय द्वारा याचिकाकर्ता पत्नी से क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान दो प्रश्न अस्वीकार किए जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस सुजय पॉल की एकलपीठ ने सुनवाई के बाद याचिकाकर्ता को दोनों प्रश्न पूछने की अनुमत्ति प्रदान करते हुए याचिका का निराकरण कर दिया।
याचिकाकर्ता सुमित बालेचा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसकी पत्नी प्रिया बालेचा ने तलाक के लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा-13 के न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत किया था। क्रॉस एग्जामिनेशन के दौरान प्रस्तुत मेडिकल दस्तावेज के संबंध में पत्नी ने उससे संबंधित होने से इनकार कर दिया। उसके बाद न्यायालय ने आदेश जारी किए कि उक्त दस्तावेज का उपयोग जिरह के रूप में नहीं कर सकते।
इसी प्रकार फ्लैट छोड़कर जाने के संबंध में पत्नी ने उत्तर दिया कि अनावेदक पति उसे साथ झगड़ा और मारपीट करता था। तलाक देने की धमकी देते था। पति किन्हीं कारणों से मारपीट करता था, इस प्रश्न पर न्यायालय का आदेश था कि यह प्रश्न अनावेदक पति से पूछा जा सकता है। दोनों विवादित नोट को चुनौती देते हुए आदेश जारी किए थे। एकलपीठ ने याचिका का निराकरण करते हुए दोनों प्रश्नों को पूछने की अनुमति प्रदान करते हुए ट्रायल कोर्ट को सुनवाई जारी रखने के आदेश जारी किए हैं।