मध्य प्रदेश हाईकोर्ट (फाइल फोटो)
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दमोह शहर में बड़ी संख्या में अवैध होर्डिंग लगाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि होर्डिंग्स नियम 2016 के प्रभाव में आने के बावजूद भी अवैध होर्डिंग्स को नहीं हटाया जा रहा है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका की सुनवाई करते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता अनुराग हजारी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि दमोह शहर अवैध होर्डिंग से पटा हुआ है। जिसके कारण यातायात प्रभावित होता है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। होर्डिंग्स नियम 2016 के प्रभाव में आने के बाद कलेक्टरों को अवैध होर्डिंग्स के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। इसके बावजूद भी सड़क किनारे तथा मुख्य चौराहों पर लगे अवैध होर्डिंग्स को नहीं हटाया जा रहा है।
याचिका में कहा गया था कि याचिकाकर्ता साल 2019 से कलेक्टर व संबंधित अधिकारी को कई बार शिकायत दी थी। इसके बावजूद भी कार्रवाई नहीं होने के कारण उक्त याचिका दायर की गई है। याचिका में शहरी नगरी विभाग, जिला कलेक्टर तथा नगर पालिका निगम को अनावेदक बनाया गया था। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने आवेदकों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।