मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के लावाघोघरी थाने में एक गर्भवती अविवाहिता गांव के युवक के खिलाफ दुराचार की शिकायत दर्ज कराने आई थी। इसी दौरान उसे प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। पीड़ा ऐसी कि उसे अस्पताल या किसी अन्य जगह ले जाने का वक्त ही नहीं मिला। उस स्थिति में एक महिला पुलिसकर्मी नर्स की भूमिका में आ गई। महिला पुलिसकर्मी ने थाना परिसर में ही सुरक्षित प्रसव कराया। पुलिस ने अनुसार, मां-बेटी पूरी तरह से स्वस्थ्य है।
पुलिस ने बताया कि धगड़ियामाल गांव की 20 वर्षीय युवती मंगलवार को राजेंद्र जावरे के खिलाफ दुराचार की शिकायत दर्ज कराने थाने पहुंची थी। इस दौरान साढ़े सात माह की गर्भवती युवती को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई और वह दर्द से तड़पने लगी। ऐसी हालत में महिला आरक्षक शीतल ने थाने में ही युवती का प्रसव कराया। युवती ने एक बेटी को जन्म दिया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मां-बेटी दोनों स्वस्थ्य हैं, उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि युवती जिस युवक के खिलाफ शिकायत कराने थाने आई थी, वह महाराष्ट्र के नागपुर में काम करता है। फिलहाल युवती ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।
नर्सिंग का कोर्स कर चुकी महिला आरक्षक
पुलिस में भर्ती होने से पहले महिला आरक्षक नर्सिंग का कोर्स भी कर चुकी थी। इस वजह से महिला आरक्षक सुरक्षित प्रसव कराने में सफल रही।
शीतल को कॉप ऑफ द डे सम्मान दिया
लावाघोघरी थाने में सुरक्षित प्रसव कराने वाली महिला पुलिसकर्मी शीतल बाघमारे की पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल ने सराहना की। महिला आरक्षक को कॉप ऑफ द डे के सम्मान से सम्मानित किया गया है।
युवती का आरोप कि धगड़ियामाल गांव का एक युवक पीड़िता को शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करता रहा है, जिसके बाद युवती गर्भवती हो गई। युवती ने जब शादी का दबाव बनाया, तो युवक ने शादी करने से मना कर दिया। इसके बाद ही पीड़िता थाने में शिकायत करने पहुंची थी।