दुष्कर्म के आरोप में बैंगलोर में कार्यरत भोपाल निवासी इंजीनियर को हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया है। हाईकोर्ट जस्टिस देव नारायण मिश्रा की एकलपीठ ने आवेदक इंजीनियर को इलेक्ट्रॉनिक गैजेट तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के पासवर्ड जांच एजेंसी को सौंपने के निर्देश दिए हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि आवेदक के पास उपलब्ध अंतरंग तस्वीर भी पीड़िता और जांच एजेंसी के सुपुर्द करें।
भोपाल निवासी तेज नारायण शर्मा की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि कथित पीड़िता ने उसके खिलाफ भोपाल महिला थाने में दिसंबर 2024 में रेप की रिपोर्ट दर्ज कराई है। वह बैंगलोर में साल 2018 से कार्यरत है और इस दौरान उनकी पीड़िता से बात तक नहीं हुई। दोनों के बीच साल 2006 से मैत्रीपूर्ण संबंध थे। दोनों के बीच वर्ष 2010 से 2018 तक सहमति से संबंध स्थापित हुए हैं। पीड़ित के द्वारा 6 साल बाद दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज करवाई गई है।
पीड़िता और सरकार की तरफ से अग्रिम जमानत आदेवन का विरोध करते हुए कहा गया कि शादी का प्रलोभन देकर आरोपी 8 से 10 वर्षों तक पीड़िता की निजता का उल्लंघन किया है। आरोपी ने पीड़िता के साथ बार-बार शादी का वादा करते हुए उसके साथ संबंध स्थापित किये, जो दुष्कर्म की श्रेणी में आता है। इतना ही नहीं आवेदक ने पीड़िता की आपत्तिजनक तस्वीर भी अपने दोस्तों के साथ साझा की थी। शादी से इंकार करने पर पीड़ित ने उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाई है।
एकलपीठ ने आवेदक को अग्रिम जमानत का लाभ प्रदान करते हुए अपने आदेश में कहा है कि दोनों 2010 से 2018 तक लंबे समय तक रिलेशनशिप में थे। दोनों अलग-अलग स्थानों पर सेवारत थे, लेकिन तब निजता के उल्लंघन का कोई आरोप नहीं लगाया गया था। एकलपीठ ने आवेदक को आदेशित किया है कि उसके पास उपलब्ध दस्तावेज और अंतरंग तस्वीरें जांच एजेंसी और पीड़िता को सौंपेगा। इसके अलावा अपने सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट जैसे मोबाइल, लैपटॉप आदि तथा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप आदि के पासवर्ड भी जांच एजेंसी को सौंपेगा। जांच एजेंसी डिजिटल परिधीय उपकरणों से डेटा प्राप्त करने के बाद आवेदक के सभी गैजेट वापस कर देगी।