मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने आईपीएस कैडर पुनरीक्षण में देरी के मामले में केंद्र सरकार की याचिका खारिज कर कैट का आदेश बरकरार रखा। केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया 120 दिन में पूरी करनी होगी।
मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर पीठ ने भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) कैडर पुनरीक्षण में देरी के मामले में केंद्र सरकार की याचिका प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दी। न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें अतिरिक्त कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया 120 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए गए थे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार के उस तर्क को स्वीकार नहीं किया, जिसमें कहा गया था कि कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया समय-समय पर नियमानुसार होती रही है और इसमें किसी तरह की देरी नहीं हुई।
कैट के आदेश को केंद्र ने दी थी चुनौती
केंद्र सरकार ने कैट के इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। केंद्र की ओर से दलील दी गई कि कैडर पुनरीक्षण का कार्य समयबद्ध तरीके से किया जाता रहा है। हालांकि, हाई कोर्ट ने केंद्र की याचिका को प्रवेश स्तर पर ही खारिज कर दिया। इससे कैट का आदेश प्रभावी बना हुआ है।
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राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के अवसरों का मामला
अधिकारियों की ओर से यह भी कहा गया कि केवल यह कहना पर्याप्त नहीं है कि कैडर पुनरीक्षण किसी समय किया गया था। नियमों के अनुसार निर्धारित अवधि में पुनरीक्षण होना और पात्र अधिकारियों को अवसर मिलना जरूरी है।
120 दिन में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश बरकरार
हाई कोर्ट की युगलपीठ द्वारा कैट के आदेश को बरकरार रखे जाने के बाद केंद्र और राज्य सरकार के लिए अतिरिक्त आईपीएस कैडर पुनरीक्षण की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे और अक्षय खंडेलवाल ने पैरवी की। उन्होंने केंद्र सरकार की याचिका के आधारों का विरोध किया। यह फैसला राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि कैडर पुनरीक्षण में देरी का असर उनकी वरिष्ठता, पात्रता और पदोन्नति के अवसरों पर पड़ सकता है।