मध्यप्रदेश हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन द्वारा बिना मान्यता के कार्यालय संचालन के मामले में दोनों संघों की ओर से कहा गया कि विलय की दिशा में प्रयासरत है। इस संबंध में आगामी छह सितंबर को दोनों बार के पदाधिकारियों की संयुक्त बैठक भी बुलाई गई है। उसमें जरूर ही कोई निष्कर्ष निकलेगा। चीफ जस्टिस रवि विजय मलिमठ और जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने बात को रिकार्ड पर लेते हुए मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।
गौरतलब है कि साल 2016 में अधिवक्ता अमित पटेल की ओर से यह याचिका दायर की गई थी, जिसमें आरोप था कि हाईकोर्ट एडवोकेट्स बार एसोसिएशन को स्टेट बार काउंसिल से मान्यता नहीं होने के बावजूद अवैधानिक रूप से कॉपिंग सेक्शन के सामने हाईकोर्ट द्वारा बड़ा हॉल आवंटित किया गया था। याचिका में मांग की गई थी इस हॉल को खाली कराया जाए।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा ने न्यायालय को बताया था कि बार का बकाया बिजली बिल भी बहुत हो गया है, जिसका भुगतान नहीं किया गया। इसी मामले में दोनों संघों ने याचिका दायर कर बार का बिजली बिल सरकार से भराने की मांग की है। इसके अलावा एडवोकेट्स बार ने स्टेट बार काउंसिल से मान्यता दिलाने की मांग को लेकर भी याचिका दायर की है। सभी याचिकाओं पर एकसाथ सुनवाई हो रही है। सोमवार को हुई सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने मामले की सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।