मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की जलने से हुई मौत के मामले में आरोपी पति को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस दौरान अभियोजन की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे बौद्धिक बेईमानी करार दिया। हाईकोर्ट की युगलपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राम कुमार चौबे शामिल थे, ने कहा कि रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत निराश है कि अभियोजन इस स्तर तक बौद्धिक रूप से बेईमान हो सकता है।
दरअसल, राज्य सरकार ने पन्ना जिले के निवासी प्रकाश विश्वास के खिलाफ दायर उस अपील को चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उसे गैर-इरादतन हत्या और दहेज उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया था। मामला उसकी पत्नी कविता विश्वास की जलने से हुई मौत से जुड़ा था।
कोर्ट ने पाया कि कविता विश्वास को 30 मई 2020 को जलने की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 26 जून 2020 को उसकी मौत हो गई थी। नायब तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी ने मृतका का मृत्युपूर्व बयान दर्ज किया था, जो उसके माता-पिता और भाई की मौजूदगी में लिया गया था। बयान में मृतका ने स्पष्ट कहा था कि उस पर गर्म चाय गिरने से वह जली थी और इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।
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युगलपीठ ने आदेश में कहा कि अभियोजन द्वारा नायब तहसीलदार के सामने दर्ज किए गए इस महत्वपूर्ण मृत्युपूर्व बयान को अदालत में पेश नहीं करना गंभीर चूक है। अभियोजन राज्य का प्रतिनिधि होता है और उस पर यह जिम्मेदारी होती है कि जांच में जुटाए गए सभी साक्ष्य निष्पक्ष रूप से अदालत के सामने रखे जाएं, ताकि न्यायालय सही निष्कर्ष तक पहुंच सके।
कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने यह अपील भी अन्य मामलों की तरह बिना समुचित विचार किए दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया।