फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jabalpur: मृत्युपूर्व बयान छिपाना बौद्धिक बेईमानी, हाईकोर्ट की तल्ख टिप्पणी के साथ सरकार की अपील खारिज; जानें

Thu, 29 Jan 2026 05:46 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मृत्युपूर्व बयान पेश न करने को बौद्धिक बेईमानी बताते हुए पत्नी की मौत मामले में आरोपी पति को बरी करने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी। पढ़ें पूरी खबर

विज्ञापन
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पत्नी की जलने से हुई मौत के मामले में आरोपी पति को दोषमुक्त किए जाने के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने इस दौरान अभियोजन की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए इसे बौद्धिक बेईमानी करार दिया। हाईकोर्ट की युगलपीठ, जिसमें जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस राम कुमार चौबे शामिल थे, ने कहा कि रिकॉर्ड देखने के बाद अदालत निराश है कि अभियोजन इस स्तर तक बौद्धिक रूप से बेईमान हो सकता है।

विज्ञापन


दरअसल, राज्य सरकार ने पन्ना जिले के निवासी प्रकाश विश्वास के खिलाफ दायर उस अपील को चुनौती दी थी, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने उसे गैर-इरादतन हत्या और दहेज उत्पीड़न के आरोपों से बरी कर दिया था। मामला उसकी पत्नी कविता विश्वास की जलने से हुई मौत से जुड़ा था।

कोर्ट ने पाया कि कविता विश्वास को 30 मई 2020 को जलने की हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान 26 जून 2020 को उसकी मौत हो गई थी। नायब तहसीलदार दीपा चतुर्वेदी ने मृतका का मृत्युपूर्व बयान दर्ज किया था, जो उसके माता-पिता और भाई की मौजूदगी में लिया गया था। बयान में मृतका ने स्पष्ट कहा था कि उस पर गर्म चाय गिरने से वह जली थी और इसके लिए कोई जिम्मेदार नहीं है।
विज्ञापन


पढ़ें; किताबों की जगह झाड़ू: सरकारी भवन में निजी स्कूल, मासूम छात्राओं से लगवाई झाड़ू; सागर में सिस्टम शर्मसार

युगलपीठ ने आदेश में कहा कि अभियोजन द्वारा नायब तहसीलदार के सामने दर्ज किए गए इस महत्वपूर्ण मृत्युपूर्व बयान को अदालत में पेश नहीं करना गंभीर चूक है। अभियोजन राज्य का प्रतिनिधि होता है और उस पर यह जिम्मेदारी होती है कि जांच में जुटाए गए सभी साक्ष्य निष्पक्ष रूप से अदालत के सामने रखे जाएं, ताकि न्यायालय सही निष्कर्ष तक पहुंच सके।
विज्ञापन


कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि राज्य सरकार ने यह अपील भी अन्य मामलों की तरह बिना समुचित विचार किए दायर की। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को सही ठहराते हुए सरकार की अपील को खारिज कर दिया।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें