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प्रेमी हत्या केस: एमपी हाईकोर्ट ने किशोरी को माना नाबालिग, अब किशोर न्याय बोर्ड में चलेगा मामला

Sat, 24 May 2025 09:45 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें लड़की को बालिग माना गया था। कोर्ट ने कहा कि स्कूल और मैट्रिक के सर्टिफिकेट के हिसाब से लड़की की उम्र 18 साल से कम है। इसलिए उसके खिलाफ प्रेमी की हत्या का केस अब किशोर न्याय बोर्ड में चलेगा।
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(प्रतीकात्मक फोटो - फोटो : Meta AI
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विस्तार
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मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द कर दिया है जिसमें अपीलकर्ता को बड़ा (बालिग) माना गया था। कोर्ट ने कहा है कि स्कूल और मैट्रिक के प्रमाणपत्रों के अनुसार अपीलकर्ता की उम्र 18 साल से कम है। इसलिए प्रेमी की हत्या के मामले की जांच किशोर न्याय बोर्ड द्वारा होनी चाहिए।
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अपीलकर्ता ने सत्र न्यायालय के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उसे बड़ा मानकर मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में करने का आदेश दिया गया था। यह मामला भोपाल के अशोका गार्डन थाने का है, जहां 27 जुलाई 2019 को अपीलकर्ता पर अपने प्रेमी पीयूष जैन की हत्या का आरोप है।

किशोर न्याय बोर्ड ने स्कूल और मैट्रिक के दस्तावेजों के आधार पर अपीलकर्ता को नाबालिग माना था। लेकिन मृतक के पिता ने सत्र न्यायालय में अपील की थी। सुनवाई के दौरान नगर निगम का जन्म प्रमाणपत्र और नर्सिंग होम के रजिस्टर के अनुसार अपीलकर्ता की जन्मतिथि 20 सितंबर 1999 बताई गई थी, इसलिए उसे बड़ा माना गया था। इस वजह से मामले की सुनवाई सत्र न्यायालय में करने का आदेश दिया गया था।
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हाईकोर्ट के एकलपीठ ने कहा कि ऑसिफिकेशन रिपोर्ट के मुताबिक अपीलकर्ता की उम्र 17 से 19 साल के बीच हो सकती है। लेकिन जब स्कूल और जन्म प्रमाणपत्र जैसे दस्तावेज मौजूद होते हैं, तो उन्हें ज्यादा महत्व दिया जाता है। इस आधार पर कोर्ट ने अपीलकर्ता की जन्मतिथि 27 अगस्त 2001 मानी और कहा कि वह नाबालिग है। इसलिए मामला किशोर न्याय बोर्ड के पास जाना चाहिए।
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