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MP High Court: एक अपराध के लिए कैसे दर्ज हो सकती हैं दो एफआईआर, हाईकोर्ट ने CBI पर लगाया 25 हजार का जुर्माना

Fri, 15 Sep 2023 10:58 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

एक ही मामले में दो एफआईआर करने के मामले को लेकर हाईकोर्ट में सुनवाई की गई। हाईकोर्ट ने इसे गलत मानते हुए सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही सीबीआई पर 25 हजार का जुर्माना भी लगाया है। 
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(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
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राज्य सरकार द्वारा एफआईआर दर्ज करवाए जाने के बावजूद भी सीबीआई द्वारा एक अन्य व्यक्ति की शिकायत पर उसी मामले में एफआईआर दर्ज किए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू ने सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर को निरस्त करने के आदेश जारी किए हैं। हाईकोर्ट ने सीबीआई की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जाहिर करते हुए 25 हजार रुपये की कॉस्ट भी लगाई है।
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याचिकाकर्ता प्रमोद शर्मा की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि वह सिवनी जिले से प्रकाशित दैनिक दल सागर नामक अखबार के संपादक व प्रकाशक हैं। उनके द्वारा घोषित प्रतियों से कम का प्रकाशन किए जाने की शिकायत पर आयुक्त जनसंपर्क ने जांच के लिए चार सदस्यीय कमेटी गठित की थी। जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि उनके द्वारा मात्र 22 सौ प्रतियों का प्रकाशन किया जाता है। जांच के रिपोर्ट के आधार पर उनके खिलाफ पेपर्स एंड बुक पब्लिकेशन एक्ट की धारा 3, 12, 14 तथा 15 सहित 420 के तहत प्रकरण दर्ज किया था।

अपराधिक प्रकरण दर्ज होने के बावजूद भी उसी मामले में व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी दैनिक संवाद कुंज के संपादक ने सीबीआई में शिकायत की थी। सीबीआई ने उनकी शिकायत पर विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया था। याचिका में कहा गया था कि एक ही अपराध में उसके खिलाफ दो एफआईआर दर्ज की गई हैं।
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हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पाया कि दोनों एफआईआर एक ही अपराध से संबंधित हैं। हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किए। आदेश में कहा है कि कॉस्ट की राशि में से 15 हजार रुपये याचिकाकर्ता को तथा दस हजार रुपये मप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण में जमा करवाए जाएं। मप्रराविसेप्रा उक्त राशि कृत्रिम अंग के लिए नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल अस्पताल को प्रदान करे। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता शिवेन्द्र पांडे ने पैरवी की।
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