फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jabalpur News: क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

Fri, 12 Sep 2025 10:38 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मप्र हाईकोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग वीडियो के दुरुपयोग पर गंभीरता दिखाते हुए सभी क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग रोक दी। याचिका में वीडियो को मीम्स व शॉर्ट्स बनाकर न्यायालय की गरिमा भंग करने की बात कही गई थी। कोर्ट ने रजिस्ट्रार व सोशल मीडिया कंपनियों को नोटिस जारी कर 25 सितंबर तक जवाब मांगा। 
विज्ञापन
क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मप्र हाईकोर्ट चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो के दुरुपयोग को चुनौती देने वाली जनहित याचिका को बेहद गंभीरता से लिया। युगलपीठ ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित करते हुए सभी क्रिमिनल कोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग पर रोक लगा दी। युगलपीठ ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल, रजिस्ट्रार आईटी, यू-ट्यूब, मेटा, यू-ट्यूब के शिकायत अधिकारी सूरज राव और मेटा प्लेटफॉर्म्स की शिकायत अधिकारी अमृता कौशिक को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिका पर अगली सुनवाई 25 सितंबर को निर्धारित की है।

विज्ञापन


ये भी पढ़ें- MES के तीन कर्मचारी सहित ठेकेदार सीबीआई की रिमांड पर, वर्क आर्डर जारी करने के बदले मांगी थी घूस

याचिका में बताया ये कारण
बता दें कि जबलपुर निवासी अधिवक्ता अरिहंत तिवारी और विदित शाह की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की लाइव स्ट्रीमिंग के वीडियो यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर मीम्स या शॉर्ट्स के माध्यम से डाली जाती है। इस प्रकार का कृत्य न्यायालय की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला तथा आपत्तिजनक है। कई बार न्यायाधीशों द्वारा ओपन कोर्ट में कही बातों को मिर्च मसाला लगाकर उन्हें प्रसारित किया जाता है। ऐसा कृत्य अदालत की अवमानना की श्रेणी में आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें- जॉली एलएलबी-थ्री के गाने का विरोध, एक्टर अक्षय कुमार-अरशद वारसी सहित अन्य से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

नोटिस जारी कर मांगा जवाब
याचिका में मांग की गई कि यू-ट्यूब के स्थान पर वेबेक्स आधारित प्लेटफॉर्म के जरिए प्रकरणों की लाइव स्ट्रीमिंग की जाए, जो कि कुछ हद तक सुरक्षित है। याचिका में राहत चाही गई कि रजिस्ट्रार आईटी भी इस तरह की गतिविधियों पर मॉनिटरिंग करें और नियंत्रण सुनिश्चित करें। युगलपीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से लेते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है। 

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें