जबलपुर में शादी के लिए किराए पर ली गई पगड़ी को लौटाते समय दुकानदार ने सुरक्षा राशि देने से इंकार कर दिया। जिसे चुनौती देते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के समक्ष परिवाद दायर किया गया था। आयोग ने इससे सेवा में कमी मानते हुए सुरक्षा निधि के साथ मानसिक क्लेश व वाद व्यय के रूप में दो हजार रुपये देने के आदेश जारी किए हैं।
अधिवक्ता अजितेश शर्मा की तरफ से दायर किए गए परिवाद में कहा गया था कि पीड़ित ने 9 फरवरी 2022 को जबलपुर की खोवा मंडी स्थित जयश्री भंडार से शादी के लिए 15 पगड़ी किराए पर ली थी। पगड़ी का किराया 50 रुपये निर्धारित हुआ था और सुरक्षा निधि के तौर पर 100 रुपये जमा करने थे। जब पीड़ित पगड़ी वापस करने पहुंचा तो दुकान संचालक ने सुरक्षा निधि लौटाने से इंकार कर दिया।
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अनावेदक दुकानदार की तरफ से तर्क दिया गया था आवेदक 23 दिन बाद 3 मार्च 2022 को पगडी लौटाने आया था। आवेदक को 24 घंटों के अंदर पगड़ी वापस करनी थी। इस शर्त के संबंध में उसने आवेदक को बता दिया था। आयोग के अध्यक्ष पंकज यादव की तीन सदस्यीय पीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि अनावेदक के द्वारा दी गई सुरक्षा निधि की रसीद में उक्त शर्त का उल्लेख नहीं है। आयोग ने पाया कि 24 घंटों में पगड़ी वापस करने की शर्त को कोई साक्ष्य नहीं है। आयोग ने इसे सेवा में कमी मानते हुए उक्त आदेश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता अरुण मिश्रा ने पैरवी की।