पर्यटन स्थलों में नागरिकों की सुरक्षा संबंधित उपाय किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि पर्यटकों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने हाईकोर्ट के आश्वासन दिया कि सरकार की गलती के कारण कोई हादसा नहीं होगा। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस विशाल मिश्रा की युगलपीठ ने याचिका को खारिज कर दिया।
भोपाल निवासी सचिन्द्र पांडे की तरफ से दायर की गई याचिका में मांग की गई थी कि पर्यटक स्थलों में घूमने आने वाले व्यक्तियों की सुरक्षा के लिए सरकार आवश्यक कार्रवाई करे। सुरक्षा की दृष्टि से उन्हें लाइफ जैकेट उपलब्ध करवाए। घनत्व को देखते हुए पर्यटकों की संख्या निर्धारित की जाए। खतरनाक पर्यटकों स्थलों पर खतरे के बोर्ड लगाए जाएं और सेल्फी प्रतिबंधित की जाए। पर्यटक स्थलों में पर्यटक पुलिस थाने स्थापित किए जाएं। थाने में पदस्थ पुलिस कर्मी पर्यटकों को प्राकृतिक खतरों के संबंध में अवगत करवाए। पर्यटक विभाग इस संबंध में प्रचार प्रसार करें।
याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से बताया गया कि पर्यटकों की सुरक्षा के संबंध में हर संभव प्रयास किया जा रहा है। अधिकांश खतरनाक स्थलों में बोर्ड लगाए गए हैं। स्थानीय पुलिस पर्यटकों को ऐसे स्थल में सावधान करने के निर्देश दे रही है। पर्यटकों की सुरक्षा के लिए सरकार आवश्यक कार्रवाई कर रही है। सरकार की गलती के कारण कोई हादसा नहीं होगा। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने याचिका का निराकरण कर दिया। याचिका में वन विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग तथा पर्यटन बोर्ड को अनावेदक बनाया गया था।