जबलपुर जिले में फर्जी वसीयतनामा के आधार पर तहसीलदार तथा पटवारी ने कार्यालय में पदस्थ महिला कम्प्यूटर ऑपरेटर के पिता के नाम पर एक हेक्टेयर से अधिक जमीन सरकारी अभिलेख में दर्ज करवा दी थी। सरकारी अभिलेख में नाम दर्ज होने के बाद उक्त जमीन को बेच दिया गया। पुलिस ने इस फर्जीवाड़े में तहसीलदार तथा पटवारी सहित सात व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी सहित अन्य धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।
अधारताल एसडीएम शिवानी सिंह ने इस संबंध में विजय नगर थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्राम रैगवां में मॉडल टाउन निवासी शिवचरण पांडे के पिता महावीर प्रसाद पांडे के नाम पर 1.01 हेक्टेयर जमीन थी। महावीर प्रसाद पांडे की मृत्यु साल 1971 में हो गयी थी, जिसके बाद शासकीय अभिलेख में उनके पुत्र का नाम दर्ज हुआ था। तहसीलदार हरि सिंह धुर्वे, पटवारी जागेन्द्र पिपले तथा कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपा पांडे ने मिलीभगत कर सरकारी अभिलेख में उक्त जमीन श्याम नारायण पांडेय के नाम पर दर्ज कर दी।
श्यामलाल पांडे कलेक्टर कार्यालय में ड्राइवर थे और कम्प्यूटर ऑपरेटर दीपा पांडे के पिता थे। उनकी मौत के बाद उक्त जमीन दीपा ने स्वयं तथा भाई रविशंकर व अजय के नाम पर शासकीय अभिलेख में दर्ज करवा ली। इसके बाद उक्त जमीन को करमेता निवासी हर्ष पटेल तथा अमित पाठक को बेच दिया।
शासकीय अभिलेख से नाम हटाने के कारण शिवचरण पांडे ने एसडीएम के समक्ष अपील दायर की थी। अपील की सुनवाई के दौरान पाया गया कि महावीर प्रसाद पांडे की पचास साल पूर्व साल 1970 की वसीयत के आधार पर तहसीलदार ने नाम परिवर्तन के आदेश जारी किये थे। वसीयत पंजीकृत नहीं थी और जिसके नाम पर वसीयत की गयी उसका महावीर प्रसाद पांडे से कोई पारिवारिक संबंध नहीं थे। तहसीलदार, पटवारी, महिला कम्प्यूटर ऑपरेटर और उसके दोनों भाइयों तथा खरीदारों ने साजिश के तहत फर्जी वसीयत तैयार कर जमीन का नामांतरण किया गया था। पुलिस ने शिकायत पर सभी सात आरोपियों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।