फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: ढाई माह के अंतराल में आठ बाघों की मौत, हाईकोर्ट में BTR के फील्ड डायरेक्टर ने पेश की स्टेटस रिपोर्ट

Wed, 25 Feb 2026 10:31 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में ढाई माह में आठ बाघों की मौत पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट पेश हुई। चार मौतें प्राकृतिक और चार करंट से बताई गईं। याचिका में बढ़ती बाघ मौतों व निगरानी तंत्र पर सवाल उठाए गए। अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी। 
विज्ञापन
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले पर मप्र हाईकोर्ट में पेश स्टेटस रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार ढाई माह के भीतर आठ बाघों की मौत हुई, जिनमें चार की मृत्यु रिजर्व क्षेत्र के भीतर प्राकृतिक कारणों से और चार की सामान्य वन क्षेत्र में करंट लगने से हुई। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को रिपोर्ट पर जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 25 मार्च निर्धारित की है।

विज्ञापन


ढाई माह में आठ बाघों की मौत
रिपोर्ट के मुताबिक 21 नवंबर से 2 फरवरी के बीच कुल आठ बाघों की मौत दर्ज की गई। रिजर्व के भीतर दो बाघों की मौत आपसी संघर्ष में, एक की कुएं में डूबने से तथा एक की प्राकृतिक बीमारी से हुई। वहीं चार बाघ सामान्य वन क्षेत्र में बिजली करंट की चपेट में आकर मारे गए। सभी मृत बाघों के अवशेष सुरक्षित पाए गए। रिपोर्ट में बताया गया कि कोर और बफर क्षेत्र में गुजरने वाली विद्युत लाइनों को वन्यजीव सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुरक्षित बनाने के लिए विद्युत विभाग को समय-समय पर पत्र भेजे गए हैं। साथ ही पेट्रोलिंग और रात्रिकालीन गश्त बढ़ाने की जानकारी भी दी गई।

ये भी पढ़ें- भोपाल में होलिका दहन का सही समय तय,भद्रा और चंद्रग्रहण के बीच निकला शुभ मुहूर्त,4 मार्च को निकलेगा जुलूस
विज्ञापन


याचिका में उठे व्यापक सवाल
भोपाल निवासी वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे की याचिका में प्रदेश में बाघों की बढ़ती मौतों पर गंभीर चिंता जताई गई है। याचिका के अनुसार विश्व में लगभग 5,421 बाघ हैं, जिनमें भारत में 3,167 और मध्यप्रदेश में 785 बाघ पाए जाते हैं, जिससे राज्य को “टाइगर स्टेट” का दर्जा मिला है। इसके बावजूद वर्ष 2025 में प्रदेश में 54 बाघों की मौत दर्ज हुई, जो प्रोजेक्ट टाइगर शुरू होने (1973) के बाद सबसे अधिक बताई गई।
विज्ञापन


शिकार और निगरानी तंत्र पर सवाल
याचिका में आरोप लगाया गया कि बिजली तारों का उपयोग कर शिकारी वन्यजीवों का शिकार कर रहे हैं तथा निगरानी और खुफिया तंत्र पर्याप्त रूप से प्रभावी नहीं है। विशेषज्ञों ने तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों की मौतों पर भी चिंता जताई है। पिछली सुनवाई में बाघों की मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई थी। रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ताओं को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 25 मार्च को होगी।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें