शासकीय विक्टोरिया अस्पताल जबलपुर
- फोटो : सोशल मीडिया
मध्यप्रदेश के जबलपुर में डायल 100 और 108 एंबुलेंस के समय पर अपातकानील सेवाएं प्रदान करने के वादे अक्सर झूठे निकलते हैं। मानवता तो शर्मसार हो गई जब गंभीर रूप से घायल दो युवकों को देखने के लिए शासकीय डॉक्टर ने बाहर आने से इनकार कर दिया। एंबुलेंस 108 का चालक पीड़ित के परिचितों से आयुष्मान कार्ड के संबंध में पूछताछ कर रहा था। यह घटना जबलपुर में पदस्थ एक न्यायिक सदस्य के साथ घटित हुई।
मौके पर देर से पहुंचीं डायल 100 और एंबुलेंस
न्यायिक सदस्य ने मीडिया को बताया कि वह रात लगभग 11 बजे घर वापस लौट रहे थे। ओमती थाना क्षेत्र के चंदन वन के पास दो मोटर साइकिलों में भिड़ंत हो गई थी। इस कारण दोनों बाइक सवार युवक गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उन्होंने बताया कि घायल युवकों को देखकर वह रुक गए। फिर उन्होंने डायल 100 और 108 एंबुलेंस को सूचित किया। बीस मिनट से अधिक समय गुजर जाने के बावजूद भी डायल 100 और एंबुलेंस नहीं आई।
उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने एक ऑटो कर दोनों घायलों को उसमें बैठाया। उनमें से एक घायल बेहोशी की हालत में था। घायलों को ऑटो से लेकर वह अस्पताल के लिए रवाना हो रहे थे तब एंबुलेंस आई थी। घायलों को फौरन इलाज मिले और उनकी जान बच सके, इसलिए घायलों को ऑटो से अस्पताल ले जाया गया। वह भी घायलों के पीछे अस्पताल पहुंच गए थे। शासकीय विक्टोरिया अस्पताल में घायलों को अंदर तक ले जाने की कोई व्यवस्था नहीं थी और न वहां कर्मचारी ही थे।
डॉक्टर ने घायलों की जांच करने से किया इनकार
न्यायिक सदस्य ने ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर से बाहर चलकर घायलों की जांच करने का आग्रह किया। डॉक्टर ने बाहर जाकर जांच करने से इनकार कर दिया। साथ ही उन्होंने घायलों को मेडिकल अस्पताल ले जाने के निर्देश जारी कर दिए। लेकिन इसके बाद एंबुलेंस चालक घायलों को मेडिकल अस्पताल ले जाने की बजाय तीमारदार से आयुष्मान कार्ड के संबंध में पूछताछ कर रहा था।
न्यायिक सदस्य ने कहा कि डॉक्टरी एक नोबल प्रोफेशन है और डॉक्टरों को भगवान का दर्जा दिया जाता है। एक डॉक्टर से इस तरह के व्यवहार की उन्हें उम्मीद नहीं थी। साथ ही उन्होंने कहा कि एंबुलेंस चालक को आयुष्मान कार्ड के संबंध में पूछताछ का अधिकार किसने प्रदान किया।