सर्विस रिकॉर्ड के हिसाब से जबरन सेवानिवृत्त किए जाने को चुनौती देते हुए शिक्षक की तरफ से हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत तथा जस्टिस विवेक जैन ने पाया कि बिना किसी दस्तावेज प्रमाणिता के सर्विस रिकॉर्ड में गलत जन्म तिथि अंकित की गयी है। युगलपीठ ने अपीलकर्ता की बहाली के आदेश के साथ उसे शत-प्रति वेतन का लाभ प्रदान करने आदेश जारी किये है।
पन्ना निवासी हाकम सिंह गौड़ की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि साल 1988 में वह सहायक प्राध्यापक के रूप में नियुक्ति हुआ था। इसके बाद साल 1994 में उसे वार्डन बना दिया गया था। सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर उसे जून 2023 में पांच साल पहले जबरन सेवानिवृत्त कर दिया गया था। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जिसके खारिज होने के कारण उक्त अपील दायर की गयी है।
याचिकाकर्ता की तरफ तर्क दिया गया था कि सर्विस रिकॉर्ड में सुधार के लिए उसने विभागीय स्तर पर आवेदन दिया था। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रायपुरा जिला पन्ना के प्राचार्य ने उसकी जन्म तिथि के पुष्टि के लिए माध्यमिक शिक्षा मंडल को पत्र लिखा था।
माध्यमिक शिक्षा मंडल की तरफ से बताया गया था कि उसकी जन्म तिथि 1 जुलाई 1965 है। इस संबंध में प्राचार्य के द्वारा जिला संगठन जनजाति कार्य विभाग को सूचित किया गया था। इसके बावजूद भी उसे पांच साल रहते सेवानिवृत्त कर दिया गया। सरकार की तरफ से तर्क दिया गया कि अपीलकर्ता ने सेवा के अंतिम समय में जन्म तिथि सुधार का आवेदन किया था। इसलिए वह किसी प्रकार की राहत पाने का हकदार नहीं है। युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि यह मामला सेवा के अंतिम समय में सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज जन्मतिथि के सुधार का नहीं है। सर्विस रिकॉर्ड में बिना किसी दस्तावेज के अपीलकर्ता की जन्म तिथि दर्ज करने गलती का है। शैक्षणिक दस्तावेज में उसकी जन्म तिथि का उल्लेख है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद षिक्षक के पक्ष में राहतकारी आदेष जारी किया।