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MP High Court: शिवराज और वीडी शर्मा के खिलाफ जारी रहेगी आपराधिक अवमानना की सुनवाई, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

Fri, 25 Oct 2024 09:30 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और वीडी शर्मा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की सुनवाई जारी रहेगी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एमपी-एमएलए विशेष कोर्ट ने केंद्रीय मंत्री तथा प्रदेश पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व सांसद विष्णु दत्त शर्मा और विधायक तथा पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के खिलाफ आपराधिक अवमानना का प्रकरण दर्ज करते हुए समन जारी किए थे। इसके खिलाफ तीनों राजनेताओं ने हाईकोर्ट की शरण लेते हुए दो याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की एकलपीठ ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए अपने आदेश में कहा है कि मामले पर संज्ञान लेने से पूर्व न्यायालय को सिर्फ यह देखना आवश्यक है कि उनके समक्ष प्रस्तुत सामग्री पर्याप्त है या नहीं। इसका मलतब यह नहीं है कि मजिस्ट्रेट यह राय बनाए कि सामग्री दोष सिद्धि के लिए पर्याप्त है या नहीं। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ दोनों याचिकाओं को खारिज कर दिया।

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गौरतलब है कि राज्यसभा सांसद व कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विवेक तन्खा ने दस करोड़ रुपये मुआवजा तथा अपराधिक अवमानना प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग करते हुए एमपी-एमएलए कोर्ट जबलपुर में परिवाद दायर किया था। परिवाद में कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी आरक्षण से संबंधित उन्होंने कोई बात नहीं कही थी। उन्होंने मध्यप्रदेश में पंचायत और निकाय चुनाव मामले में परिसीमन और रोटेशन की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में पैरवी की थी।

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव में ओबीसी आरक्षण पर रोक लगा दी तो भाजपा नेताओं ने साजिश करते हुए इसे गलत ढंग से पेश किया। शिवराज सिंह, वीडी शर्मा और भूपेंद्र सिंह ने गलत बयान देकर ओबीसी आरक्षण पर रोकने का ठीकरा उनके सिर फोड़ दिया, जिससे उनकी छवि धूमिल करके आपराधिक मानहानि की है। एमपी एमएलए विशेष कोर्ट ने 20 जनवरी को तीनों के विरुद्ध मानहानि का प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए थे। उसके खिलाफ तीनों नेताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। न्यायालय ने मामले की सुनवाई करते हुए केंद्रीय मंत्री तथा प्रदेश के पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष विष्णुदत्त शर्मा व पूर्व मंत्री भूपेन्द्र सिंह के खिलाफ प्रकरण दर्ज करने के निर्देश देते हुए उपस्थिति के लिए समन जारी किए थे, जिसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की तरफ से तर्क दिया गया था कि प्रकरण दर्ज किए जाने के लिए अपर्याप्त सामग्री है। सिर्फ अखबारों की कतरन के आधार पर मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए गए हैं, जिस अखबारों में रिपोर्ट छवि उनके पत्रकार को गवाह नहीं बनाया गया। इसके अलावा सोशल मीडिया में जो सामग्री अपलोड की गई, इसकी प्रमाणिकता के लिए फार्म-65 बी प्रस्तुत नहीं किया गया।

पूरा मामला सिविल प्रकृति है और मानहानि का दावा किया जा सकता है। आपराधिक प्रकरण का कोई मामला नहीं बनता है। अनावेदक कांग्रेस सांसद तन्खा की तरफ से कहा गया था कि प्रकरण दर्ज किए जाने की लिए पर्याप्त सामग्री है। संबंधित न्यायालय को यह विचारण करना है कि अपराध साबित होगा या नहीं। प्रकरण की सुनवाई के दौरान अन्य गवाह व साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद 21 सितंबर को आदेश सुरक्षित रखने के निर्देश जारी किए थे। एकलपीठ ने उक्त आदेश के साथ याचिकाओं को निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता भाजपा नेताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सुरेन्द्र सिंह तथा शिकायतकर्ता की तरफ से पैरवी करने सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पैरवी की।  

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