गोवंश को खुला छोड़ने वालों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट में कार्यवाहक चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य शासन, पशुपालन विभाग, एनएचएआई, कलेक्टर टीकमगढ़ सहित अन्य को सुनवाई 26 सितंबर को निर्धारित की है।
टीकमगढ़ निवसी स्वामी देव स्वरूपानंद की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि गोवंशों की दुर्दशा से सनातनियों की आस्था को गहरी चोट पहुुंच रही है। उनके धर्म में गोवंश को माता का दर्जा मिला है। तैंतीस कोटि देवी-देवताओं का गोमाता में वास होने की मान्यता है। इसके बावजूद भी बेसहारा गोवंश यहां-वहां घूमते रहते हैं। कई बार सड़क के बीच में भी पड़े रहते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।
याचिका में राहत चाही गई है कि बेसहारा गोवंश की सुरक्षा के लिए गोवंश विहार केंद्र बनाए जाए। अभ्यारण्य भी विकसित किए जा सकते हैं। इससे अपेक्षाकृत नैसर्गिक वातावरण में गोवंश न केवल सुरक्षित रहेगा, बल्कि पुष्ट भी होगा। ऐसे बाड़ों में भोजन-पानी की सुविधा मिलेगी तो गोवंश का संरक्षण-संवर्धन बेहतर हो सकेगा। हमारे पूर्वज गो-धन को सबसे बड़ा धन मानते थे। इसलिए इस दिशा में ध्यान दिया जाना अनिवार्य है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।