मेफेड्रोन ड्रग्स मामले में आरोपी की जमानत याचिका खारिज
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जबलपुर हाईकोर्ट ने मेफेड्रोन ड्रग्स निर्माण और तस्करी से जुड़े मामले में आरोपी को राहत देने से इंकार करते हुए उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आरोपी ने एक कंपनी के नाम और उसके जीएसटी पंजीकरण का कथित रूप से दुरुपयोग कर ऐसे रासायनिक पदार्थ मंगवाए, जिनका उपयोग साइकोट्रोपिक पदार्थ मेफेड्रोन के निर्माण में किया जाता है। अदालत ने कहा कि मामले में उपलब्ध शुरुआती साक्ष्य मजबूत और ठोस हैं, जो आरोपी तथा नशीली दवाओं के अवैध उत्पादन के बीच सीधा संबंध दर्शाते हैं।
कोर्ट ने अपने आदेश में टिप्पणी करते हुए कहा कि ड्रग तस्करी और नशीली दवाओं का गैर-कानूनी उत्पादन बेहद गंभीर अपराध हैं। ऐसे अपराध समाज की संरचना को कमजोर करते हैं और युवाओं सहित आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करते हैं।
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अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि एनडीपीएस एक्ट केवल नशीले पदार्थ रखने वालों को दंडित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य ड्रग तस्करी के पूरे नेटवर्क को खत्म करना है। इसमें वित्त पोषण, उत्पादन, परिवहन और बिक्री जैसी सभी गतिविधियां शामिल हैं। एकल पीठ ने कहा कि अभियोजन पक्ष का मामला नशीली दवाओं के निर्माण, तस्करी और वितरण से जुड़ी कथित आपराधिक साजिश पर आधारित है और आरोपी की उसमें सक्रिय भूमिका होने के पर्याप्त प्रारंभिक संकेत मिले हैं।
अदालत ने कहा कि आपराधिक साजिश से जुड़े मामलों में यह स्थापित कानूनी सिद्धांत है कि यदि साजिश सिद्ध हो जाती है, तो साजिश को आगे बढ़ाने के लिए किसी एक सह-आरोपी द्वारा किया गया कार्य सभी सह-साजिशकर्ताओं का कार्य माना जाता है। इन टिप्पणियों के साथ हाईकोर्ट की एकल पीठ ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी।