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Jabalpur News: मऊगंज हिंसा मामले में सरकार का जवाब हाईकोर्ट में, सीबीआई जांच की मांग खारिज

Sat, 10 Jan 2026 05:13 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

मऊगंज में आदिवासी परिवारों के साथ हुई हिंसा की सीबीआई जांच की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सरकार ने जांच दस्तावेजों के साथ स्टेटस रिपोर्ट पेश करते हुए आरोपों को निराधार बताया।
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CBI inquiry is not necessary in Mauganj violence case
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विस्तार
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मऊगंज में आदिवासी परिवारों के साथ हुई हिंसा की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा एवं न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ के समक्ष राज्य सरकार की ओर से जांच से संबंधित दस्तावेजों के साथ स्टेटस रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिका में लगाए गए आरोप निराधार हैं और मामले में सीबीआई जांच की आवश्यकता नहीं है। युगलपीठ ने सरकार द्वारा पेश जवाब पर याचिकाकर्ता को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की है।

पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना ने याचिका में क्या कहा?

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रीवा जिले के हनुमना निवासी एवं पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना द्वारा दायर याचिका में कहा गया है कि मऊगंज के ग्राम गडरा में आदिवासी परिवारों की भूमि खाली कराने के लिए भू-माफियाओं ने उनके साथ मारपीट की थी। यह घटना बाद में हिंसक रूप ले चुकी थी, जिसमें जमकर उपद्रव हुआ। याचिका के अनुसार, इस दौरान ड्यूटी पर तैनात एक एएसआई की भी मौत हो गई थी। आरोप लगाया गया है कि इसके बाद माफियाओं ने कई आदिवासियों की हत्या कर दी, वहीं एक आदिवासी परिवार के तीन सदस्य फांसी के फंदे पर लटके हुए मिले थे।

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डेढ़ से दो सौ आदिवासी परिवार अपने घर छोड़कर पलायन कर गए

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याचिका में यह भी कहा गया है कि इस हिंसा में करीब आधा दर्जन लोगों की मौत हुई और दहशत के चलते लगभग डेढ़ से दो सौ आदिवासी परिवार अपने घर छोड़कर पलायन कर गए, जिनके संबंध में अब तक कोई ठोस जानकारी सामने नहीं आई है। उच्चाधिकारियों से शिकायत के बावजूद निष्पक्ष जांच न होने के कारण याचिका दायर किए जाने की बात कही गई है।

याचिका में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) रीवा, आईजी रीवा, मऊगंज के कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक, केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव तथा सीबीआई को पक्षकार बनाया गया है। कोर्ट के आदेशानुसार सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई।

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