मप्र हाईकोर्ट से प्रदेश भर के वकीलों को बड़ी राहत मिली है। दरअसल हड़ताल पर जाने के कारण वकीलों व अधिवक्ता संघों के खिलाफ चल रहीं अवमानना की कार्यवाही चीफ जस्टिस की अध्यक्षता वाली युगलपीठ ने समाप्त कर दी है। हाईकोर्ट ने उक्त फैसला मप्र स्टेट बार काउंसिल द्वारा बिना शर्त मांगी गई माफी को मद्देनजर रखते हुए दिया है।
उल्लेखनीय है कि निचली अदालतों में पुराने 25 मामले हर तीन माह में निराकरण के निर्देश हाईकोर्ट प्रशासन ने जारी किये थे। जिसका विरोध करते हुए मप्र स्टेट बार काउंसिल के आह्वान पर पूरे प्रदेश के वकीलों ने 23 मार्च 2023 को न्यायिक कार्य से विरत रहने का निर्णय लिया था और पूरे प्रदेश भर के वकीलों ने प्रतिवाद दिवस मनाया था। जिस पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप में करते हुए सभी वकीलों को काम पर लौटने के निर्देश जारी किये थे।
उक्त आदेश का पालन न होने पर हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही के निर्देश जारी करते हुए अधिवक्ता संघों व एसबीसी सहित वकीलों को नोटिस जारी किये थे। हाईकोर्ट के उक्त फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। मामले में गुरुवार को सुनवाई दौरान एसबीसी के चेयरमैन राधेलाल गुप्ता ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट से उनकी ओर मामला वापस ले लिया गया है, इतना ही नहीं एसबीसी के आह्वान पर वकीलों ने प्रतिवाद दिवस मनाया था, इस पर वह स्वयं सभी की ओर से माफी चाहते है। जिस पर न्यायालय ने उक्त अवमानना मामले का पटाक्षेप कर दिया।