भोपाल गैस त्रासदी के संबंध में दायर याचिकाओं पर हाईकोर्ट में सुनवाई जारी है। मामले में हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू व जस्टिस वीरेन्द्र सिंह की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा है कि संतोषजनक जवाब पेश नहीं करने पर जवाबदार अधिकारियों को तलब किया जाएगा। उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की चेतावनी देते हुए युगलपीठ ने अगली सुनवाई 22 सितंबर को निर्धारित की है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने साल 2012 में भोपाल गैस पीड़ित महिला उद्योग संगठन सहित अन्य की ओर से दायर की गई याचिका की सुनवाई करते हुए भोपाल गैस पीड़ितों के उपचार व पुनर्वास के संबंध में 20 निर्देश जारी किए थे। इन बिंदुओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित कर मॉनिटरिंग कमेटी का गठित करने के निर्देश भी जारी किए थे। साथ ही कहा था मॉनिटरिंग कमेटी प्रत्येक तीन माह में अपनी रिपोर्ट हाईकोर्ट के समक्ष पेश करेगी। इसके आधार पर हाईकोर्ट द्वारा राज्य सरकार को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जा सकेंगे। जिसके बाद उक्त याचिका पर हाईकोर्ट द्वारा सुनवाई की जा रही थी।
याचिका के लंबित रहने के दौरान मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं का परिपालन नहीं किएजाने के खिलाफ भी अवमानना याचिका दायर की गई थी। अवमानना याचिका में कहा गया था कि गैस त्रासदी के पीड़ित व्यक्तियों के हेल्थ कार्ड तक नहीं बने हैं। अस्पतालों में आवश्यकता अनुसार उपकरण व दवाएं उपलब्ध नहीं हैं। बीएमएचआरसी के भर्ती नियम का निर्धारण नहीं होने के कारण डॉक्टर व पैरा मेडिकल स्टॉफ स्थायी तौर पर अपनी सेवाएं प्रदान नहीं करते हैं।
अवमानना याचिका में केंद्रीय परिवार कल्याण विभाग के सचिव रंजन भूषण, केंद्रीय रसायन व उर्वरक विभाग के सचिव आरती आहूजा, प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव इकबाल सिंह बैस, भोपाल गैस त्रासदी सहायता एव पुनर्वास विभाग के सचिव मोहम्मद सुलेमान, आईसीएमआर के वरिष्ठ डिप्टी डायरेक्टर आर राम तथा बीएमएसआरसी के संचालक डॉ. प्रभा तथा एनआईआरई के संचालक राजनारायण तिवारी को अनावेदक बनाया गया था।
याचिका पर गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान केन्द्र व राज्य सरकार द्वारा मॉनिटरिंग कमेटी की अनुशंसाओं पर की गई कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट पेश करने के लिए समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। युगलपीठ ने बीएमएचआरसी में जारी भर्ती प्रक्रिया पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उक्त आदेश जारी किए। सुनवाई के दौरान अधिवक्ता आर बी साहू ने पैरवी की।