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MP High Court: भोपाल क्राइम ब्रांच ने चार दिन अवैध हिरासत में रखकर मांगे 18 लाख, जानें पूरा मामला

Sat, 21 Dec 2024 09:33 PM IST
जबलपुर ब्यूरो न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर

सार

थाने की सीसीटीवी फुटेज तथा कथित पुलिस कर्मियों की पहचान करने के लिए सरकार को दो सप्ताह की मोहलत मिली है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट, जबलपुर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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क्राइम ब्रांच भोपाल द्वारा चार दिन तक एमपी नगर स्थित अपराध शाखा में अवैध रूप में हिरासत में रखकर परिजनों से 18 लाख रुपये परिजनों से मांगे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि दौरान क्राइम ब्रांच के कथित पुलिस कर्मियों ने लॉकअप में उसे शारीरिक व मानसिक रूप से यातना दी थी। सरकार की तरफ से अपराध थाना एमपी नगर भोपाल की सीसीटीवी फुटेज तथा कथित कर्मियों के संबंध में जानकारी एकत्र करने समय प्रदान करने का आग्रह किया। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल की एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए याचिका पर अगली सुनवाई जनवरी माह के प्रथम सप्ताह में निर्धारित की है।

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राजस्थान के ग्राम नोखा जिला बीकानेर निवासी छात्र राजा राम की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि चार दिसम्बर की शाम को वह अपने तीन साथियों के साथ दोस्त के विवाह में शामिल होने जा रहा था। इस दौरान चार सादे कपड़े पहने व्यक्तियों ने उनकी गाड़ी को रूकवाया और जबरदस्ती वाहन क्रमांक एमपी-04 2541 में बैठा लिया। उसके दोस्तों ने घटनाक्रम की कुछ तस्वीरे ली है। वाहन में बैठालकर उसे अगले दिन एमपी नगर भोपाल स्थित अपराध शाखा में लाया गया। रास्ते में चारों व्यक्ति एक दूसरे को दिलीप बॉक्सर, जूबेद पठान, प्रतीक तथा जीतू नाम से संबोधित कर रहे थे। उन्होंने रास्ते में शराब पी और उसकी सोने की चेन, अंगूठी, कड़ा, पर्स व मोबाइल लूट लिए।

अपराध शाखा में उसे 5 दिसंबर से 8 दिसम्बर तक लॉकअप में अवैध रूप से रखा गया और न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया। इस दौरान उसे मानसिक व शारीरिक रूप से यातनाएं देकर प्रताड़ित किया गया। लॉकअप में उसके हाथ-पैर में बेडिया डाल दी गयी थी। इस दौरान उसके तथा दो अन्य मोबाइल फोन पुलिस कर्मियों ने परिजनों से संपर्क कर 18 लाख की अवैध मांग की गयी। उसका रिश्ते का भाई सुखदयाल 8 दिसंबर को एमपी नगर स्थित अपराध शाखा पहुंचा तो पुलिस ने उसे भी लॉकअप में बंद कर दिया था। इसके बाद अगले दिन उसे तथा भाई को पुलिस ने उन्हें रुपये लाने के लिए छोड़ दिया। छोड़ने से पहले उन्होंने रुपये लाने के संबंध में लिखित अंडरटेकिंग ली और उसका वीडियो भी बनाया। याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि रुपये की मांग करते हुए क्राइम ब्रांच ने कर्मचारियों ने उसका अपहरण किया और लूट की।
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याचिका की प्रारंभिक सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि याचिकाकर्ता ने जिन नामों का उल्लेख किया है उनकी पहचान सुनिश्चित की जाए,जिससे उन्हें अनावेदक बनाया जाये। इसके अलावा 4 से 9 दिसम्बर तक अपराध शाखा एमपी नगर के वीडियो फुटेज पेन ड्राइव में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किये जाये। इसके अलावा पुलिस आयुक्त भोपाल मामले में अपना हलफनामा प्रस्तुत करें। याचिका पर हुई सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से वीडियो फुटेज, आयुक्त का हलफनामा तथा कथित पुलिस कर्मियों की पहचान करने समय प्रदान करने का आग्रह किया गया। एकलपीठ ने आग्रह को स्वीकार करते हुए दो सप्ताह का समय प्रदान किया है। 

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