शासकीय आयुर्वेद कॉलेज जबलपुर के सेवानिवृत्त प्रभारी प्राचार्य को हाईकोर्ट से राहत मिली है। मंत्रिमंडल के अनुमोदन तथा राज्यपाल की अनुशंसा के बाद जारी की गई चार्जशीट को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। जस्टिस जीएस अहलूवालिया की एकलपीठ ने पाया कि घटना के चार साल पूरे होने के दो दिन बाद चार्जशीट जारी की गई है।
डॉ जीएल टिटोनी की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि जबलपुर स्थित शासकीय आयुर्वेद कॉलेज से 31 अक्टूबर 2013 को प्रभारी प्राचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उन पर आरोप था कि उन्होंने 19 अगस्त 2013 को आयोजित कार्य परिषद की बैठक में जिन बिन्दुओं पर चर्चा नहीं हुई, उन्हें अनुमोदन के लिए भेज दिया था। मंत्रिमंडल ने सात अक्टूबर 2017 को विभागीय कार्यवाही की अनुशंसा करते हुए सहमति के लिए प्रस्ताव राज्यपाल को भेज दिया था। राज्यपाल की अनुशंसा के बाद उन्हें 10 अक्टूबर 2017 को चार्जशीट जारी की गई।
याचिकाकर्ता की तरफ से तर्क दिया गया कि प्रभारी प्राचार्य रहते हुए याचिकाकर्ता ने कार्य समिति की बैठक के प्रस्ताव की रिपोर्ट आठ अक्टूबर 2013 को भेजी थी। घटना के चार साल दो दिन बाद उन्हें चार्जशीट जारी की गई है। एमपी सिविल सर्विस रूल्स के अनुसार, चार साल के बाद विभागीय कार्यवाही के लिए चार्जशीट जारी नहीं कर सकते हैं। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा कि सरकार की तरफ से दो दिन की देरी होने के संबंध में कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया। एकलपीठ ने सुनवाई के बाद जारी चार्जशीट को निरस्त कर दिया। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता धर्मेन्द्र सोनी ने पैरवी की।