जबलपुर जिला न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि पीसी एक्ट के तहत सजा से दंडित करने के लिए रिश्वत की राशि जब्त करने के साथ असम्यक लाभ की मांग प्रमाणित होना भी आवश्यक है। विशेष न्यायाधीश मनीष सिंह ठाकुर ने उक्त आदेश के साथ आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
अभियोजन के अनुसार लोकायुक्त जबलपुर द्वारा संभागीय उपायुक्त कार्यालय वाणिज्य कर कार्यालय में सहायक ग्रेड 2 के पद पर पदस्थ प्रदीप कुमार श्रीवास्तव को दो हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ पकड़ा था। उनके द्वारा एसोसिएटेडेट इलेक्ट्रिकल एजेंसी मुंबई के अधिकृत प्रतिनिधि सुरेश कुमार गुप्ता से सेल्स टैक्स के निर्धारण से संबंधित फाइल दिखाने व प्रस्तुत करने के एवज में रिश्वत ले रहा था।
ये भी पढ़ें-
भारी बारिश और उफनते नालों के बीच एसडीईआरएफ का रेस्क्यू ऑपरेशन, 98 लोगों को सुरक्षित निकाला
अभियुक्त की तरफ से पैरवी करते हुए अधिवक्ता नम्रता के अग्रवाल ने विशेष न्यायालय को बताया कि रिश्वत मांगने की रिकॉर्डिंग में आरोपी की आवाज होने के तथ्य प्रमाणित नहीं है। शिकायतकर्ता व अभियुक्त पूर्व के परिचित थे और दोनों के बीच कुछ समय पूर्व विवाद हुआ था। शिकायतकर्ता की तरफ जिस संबंधित मामले की फाइल दिखाने व प्रस्तुत करने के एवज में रिश्वत मांग की बात गई है, वह अपील बोर्ड भोपाल का आदेश था। जो पूर्व में ही संबंधित जर्नल में प्रकाशित हो गया था।
विशेष न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि पीसी एक्ट की धारा 20 के तहत उपधारण किए जाने के लिए अभियुक्त के आधिपत्य से फिनाफथनील पाउडर नोट बरामद होना ही पर्याप्त नहीं है। असम्यक लाभ की मांग किए जाने के तथ्य भी प्रमाणित होना आवश्यक है। सिर्फ मुद्रा की बरामदगी मात्र से पीसी एक्ट की धारा 7 के अंतर्गत अपराध का गठन नही होता है। विशेष न्यायालय ने आरोपी को दोषमुक्त करने के आदेश जारी किए।