लोकपाल की नियुक्ति में अधिवक्ताओं को नहीं माना योग्य
लोकपाल नियुक्ति के विज्ञापन में अधिवक्ताओं को पद के लिए योग्य नहीं माने जाने को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट के याचिका दायर की गई थी। हाईकोर्ट जस्टिस एसएस भट्टी की एकलपीठ ने याचिका की सनुवाई करते हुए प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी व इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
टीकमगढ़ निवासी अधिवक्ता कृष्णकांत खरे की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि मप्र विद्युत कंपनी के लिए लोकपाल नियुक्ति के संबंध में मध्य प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन द्वारा नौ अक्टूबर 2025 को लोकपाल की नियुक्ति के संबंध में विज्ञापन जारी किया गया था। उसमें लोकपाल की नियुक्ति हेतु निर्धारित योग्यता लीगल अफेयर निर्धारित की गई है। इसके बावजूद लीगल अफेयर्स के तहत जिला न्यायाधीश के पद पर कार्य करने की दो वर्ष के अनुभव की अनिवार्यता की शर्त रखी गई है,जो कि अवैध है।
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लोकपाल की नियुक्ति के संबंध में राजपत्र में प्रकाशित नियम के अनुसार लीगल अफेयर्स शर्त निर्धारित की गई है। लीगल अफेयर्स के अंतर्गत अधिवक्ता भी आते हैं। याचिकाकर्ता के पास जिला न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता है, इसलिए उक्त पद के विज्ञापन में जिला न्यायाधीश के पद के अनुभव की अनिवार्यता अधिवक्ताओं के अधिकारों का हनन है।
एकलपीठ ने अपने आदेश में याचिकाकर्ता अधिवक्ता को नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने की अंतरित राहत प्रदान करते हुए कहा कि उसका रिजल्ट सार्वजनिक नहीं किया जाए। उसके रिजल्ट को हाईकोर्ट में पेश किया जाए और उनकी भागीदारी याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पैरवी की।