जबलपुर में आदिवासियों को मिली शासन से 53 एकड़ भूमि फर्जीवाड़ा कर हड़पने का मामला सामने आया है। ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद कौड़ियों के भाव आदिवासियों की जमीन खरीदने वाले टॉप ग्रेन मैनेजमेंट के प्रतिनिधि सहित तत्कालीन तीन तहसीलदार तथा चार पटवारी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।
ईओडब्ल्यू जबलपुर के पुलिस अधीक्षक देवेन्द्र सिंह राजपूत के अनुसार कटनी जिले की बरही तहसील अंतर्गत ग्राम करौंदी, ग्राम गढौहा तथा ग्राम महगवां में 53 एकड़ शासकीय भूमि आदिवासियों को दी गई थी। आदिवासियों को दी गई भूमि अहस्तांतरित थी, इसके बावजूद भी प्रलोभन देकर साल 2008 में आदिवासियों से उक्त भूमि कौड़ियों के भाव खरीद ली गई। इस संबंध में ईओडब्ल्यू से शिकायत की गई थी। जांच में पाया गया कि टॉप ग्रेन मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि रमेश सिंह ने राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से उक्त जमीन खरीदी है। आदिवासियों की भूमि होने के बावजूद भी नामांतरण के लिए जिला कलेक्टर से अनुमति नहीं ली गई थी।
तत्कालीन पटवारी नत्थूलाल, संतोष दुबे जूनियर, संतोष दुबे सीनियर तथा सुखदेख सिंह ने अभिलेखों के पूर्व के सालों का अभिलेख रोस्टर नहीं कर भूमिधारकों का नाम भूमिस्वामी के रूप में दर्ज कर दिया था। इस प्रकार रमेश सिंह के साथ मिलकर तीन तत्कालीन तहसीलदार तथा चार पटवारियों ने आदिवासियों को आवंटित 53 एकड़ अहस्तांतरित जमीन का फर्जी तरीके से नामांकन कर दिया। ईओडब्ल्यू ने आरोपियों के खिलाफ धारा 420, 467, 468, 471 तथा 120 बी सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।