मोहंती के खिलाफ जल्द शुरू हो सकती है विभागीय जांच
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हाईकोर्ट ने एमपीएसआईडीसी (मध्य प्रदेश स्टेट इंडस्ट्रीयल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन) घोटाले की जांच पर कैट द्वारा लगाई लगी रोक हटा दी है। इस आदेश से मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव सुधी रंजन मोहंती को झटका लगा है। रोक के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट जस्टिस शील नागू तथा जस्टिस एमएस भट्टी ने सरकार की याचिका को स्वीकार करते हुए कैट द्वारा लगाई रोक को खारिज कर दिया है। बता दें कि मोहंती मार्च 2020 में सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में राज्य सरकार की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया कि दिग्विजय शासन काल में प्रदेश में 810 करोड़ का उद्योग घोटाला आरोप पूर्व मुख्य सचिव एसआर मोहंती पर है। एमपीएसआईडीसी ने उद्योगों को आधी-अधूरे मापदंडों के आधार पर करोड़ों रुपये का कर्ज बांटा और कर्ज की अदायगी नहीं की। इसके बाद उन्हें विभिन्न तरीकों से माफ कर दिया था। जनवरी 2007 को चार्जशीट के जरिए अनुशासनात्मक कार्रवाई आरंभ की गई थी। जिसके खिलाफ मोहंती ने कैट की जबलपुर बैंच में याचिका दायर की थी। जबलपुर बैंच द्वारा याचिका खारिज किए जाने पर उन्होंने कैट की मुख्यपीठ में याचिका प्रस्तुत की थी। मुख्यपीठ ने दिसंबर 2018 में पारित आदेश में याचिका को खारिज करते हुए प्रकरण एक दशक से अधिक पुराना होने के कारण 6 माह में निराकृत करने के संबंधित प्राधिकारी को निर्देश किया था।
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के बाद कांग्रेस सरकार ने 28 दिसंबर 2018 को एक आदेश जारी कर उक्त जांच व अनुशासनात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी। इसके बाद सत्ता में आई भाजपा सरकार ने 4 जनवरी 2021 को कांग्रेस सरकार के उक्त आदेश को निरस्त कर मोहंती के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई पुनर्जीवित कर दिया। मोहंती ने इस आदेश को केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की जबलपुर बेंच में चुनौती दी। कैट ने 8 जुलाई 2021 को सरकार के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी थी। जिसके खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। जबलपुर हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मंगलवार को कार्मिक विभाग को मिल गई है। विभाग आदेश का परीक्षण करा रहा है। माना जा रहा है कि परीक्षण के बाद विभाग मोहंती के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर देगा।