मध्यप्रदेश के देवास में बड़ा इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट क्षेत्र बनेगा। पीथमपुर और रतलाम के बाद यह मप्र का तीसरा इंडस्ट्रियल इन्वेस्टमेंट क्षेत्र होगा। इसके लिए देवास के आसपास करीब 12 हजार एकड़ जमीन लेने की तैयारी की जा रही है। एमपीआईडीसी ने सरकार को प्रस्ताव बनाकर भी भेज दिया है।
दरअसल, देवास में औद्योगिक क्षेत्र है और यहां कई नामी कंपनियों के प्लांट भी है। शुरुआत में देवास ही मप्र का बड़ा औद्योगिक नगर था लेकिन बाद में पीथमपुर के विकसित हो जाने के बाद कंपनियों ने पीथमपुर को तरजीह दी। इसके चलते देवास में आने के बजाय कंपनियां पीथमपुर में चली गई। कुछ साल पहले जलसंकट ने भी देवास के औद्योगिक क्षेत्र पर बुरा असर डाला और कई कंपनियां बंद भी हुई। अब फिर से देवास के लिए अच्छी खबर है। इंडस्ट्री को जमीन देने के साथ ही पीथमपुर में जिस तरह से सेक्टर डेवलपमेंट हुए हैं, उसी तरह से देवास को भी विकसित किया जाएगा। इससे करोड़ों रुपये का निवेश तो होगा ही रोजगार के अवसर भी मिलेंगे। यदि ऐसा होता है तो मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के रूप में इंदौर का इंडस्ट्रियल एरिया 400 वर्ग किमी क्षेत्र का हो जाएगा। पीथमपुर, सांवेर रोड, पालदा, बेटमा के साथ अब देवास की सीमा भी औद्योगिक दृष्टि से इंदौर को उन्नत करेगी। इंदौर-भोपाल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर की दिशा में यह बड़ा कदम होगा। इसमें उद्योग नगरी देवास, मेडिकल डिवाइस पार्क की नरवल स्थित जमीन शामिल नहीं है। यदि इसे भी शामिल करें तो मालवा में इंदौर इंडस्ट्री का सेंट्रल जोन होगा। इसके आसपास देवास, उज्जैन, पीथमपुर अलग-अलग विंग होंगे, जिन्हें एमपीआईडीसी ही विकसित करेगा।
घोषित किया जाएगा निवेश क्षेत्र
बता दें कि इंदौर-भोपाल के बीच इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी प्रस्तावित है। इस लिहाज से भी यह प्रोजेक्ट अहम रहेगा। कहा जा रहा है कि एमपीआईडीसी के कार्यकारी संचालक रोहन सक्सेना ने बताया कि सरकार के निर्देश पर ही देवास को निवेश क्षेत्र घोषित किया जा रहा है। कोशिश यह है कि इंदौर से देवास, सोनकच्छ, आष्टा, सीहोर और भोपाल को एक इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जाए। यहां उद्योग विभाग इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल पार्क, कमर्शियल, रेसीडेंशियल, लॉजिस्टिक इंडस्ट्री के प्रोजेक्ट लाएगा। हालांकि क्षेत्र के हिसाब से यह पीथमपुर से एक चौथाई होगा। पीथमपुर का इंडस्ट्रियल एरिया करीब 50 हजार एकड़ में फैला है। यह देश का सबसे बड़ा इंडस्ट्रियल एरिया है। यहां पर अलग-अलग क्षेत्र की 1500 से ज्यादा कंपनियां हैं। यह स्पेशल इकोनॉमिक जोन है।
मप्र में 32 हजार करोड़ रु. का निवेश संभावित
इधर भोपाल में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए बताया कि मंत्रि-परिषद ने प्रदेश में 05 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों को 714.56 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किये जाने का प्रशासकीय अनुमोदन दिया। बैरसिया जिला भोपाल परियोजना लागत 25.88 करोड़, आष्टा (झिलेला) जिला सीहोर 99.43 करोड़, धार (तिलगारा) जिला धार 79.43 करोड़ मेगा औद्योगिक पार्क रतलाम फेस-1 जिला रतलाम 462 करोड़ और नरसिंहपुर जिला नरसिंहपुर 47.82 करोड़ की परियोजना शामिल है। इन 5 नवीन औद्योगिक क्षेत्रों के विकास से प्रदेश में लगभग 32 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होना संभावित है। साथ ही 38 हजार 450 व्यक्तियों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार उपलब्ध हो सकेगा।