डॉ. मोहन भागवत
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने स्पष्ट किया है कि संघ भारत को अपना मानने वाले को भारतीय मानता है। देश की प्रगति में सहभागी बनने और इसकी उन्नति से खुश होने वाले प्रत्येक नागरिक के साथ संघ भारतीय के रूप में व्यवहार करता है।
संघ प्रमुख ने यह बात रविवार को जबलपुर स्थित श्रीराम इंजीनियरिंग कॉलेज में आयोजित महाकौशल प्रांत के युवा शिविर के जिज्ञासा समाधान सत्र में कही। युवाओं के प्रश्नों के उत्तर देते हुए उन्होंने कहा कि संगठन धर्म या प्रांत के आधार पर भेदभाव नहीं करता, बल्कि देश के प्रति व्यक्ति का भाव और उसका व्यवहार ही सबसे महत्वपूर्ण होता है।
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युवाओं की शंकाओं का समाधान
सत्र के दौरान युवाओं ने संघ की विचारधारा, सामाजिक विषयों और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों से जुड़े प्रश्न पूछे। युवाओं की जिज्ञासाओं में जनसंख्या असंतुलन, राम मंदिर, जम्मू-कश्मीर और संघ के शताब्दी वर्ष से जुड़े विषय भी शामिल रहे। डॉ. भागवत ने इन सभी सवालों के जवाब देकर संघ के दृष्टिकोण को स्पष्ट किया। उन्होंने बौद्धिक सत्र में युवाओं को देश के लिए तन, मन और धन समर्पित करने की भावना के साथ कार्य करने का संदेश दिया।
राजनीतिक प्रश्नों का नहीं दिया उत्तर
डॉ. भागवत ने युवाओं से संवाद के दौरान राजनीतिक विषयों पर प्रश्नों के उत्तर देने से यह कहकर इन्कार कर दिया कि संघ का इससे कोई वास्ता नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रश्न राजनीतिक लोगों से पूछे जाने चाहिए। कार्यक्रम के दौरान ऐसे कई राजनीतिक प्रश्न किए जाने पर उन्होंने स्वयं भी यह सवाल उठाया कि विद्यार्थी आखिर राजनीतिक प्रश्न क्यों पूछ रहे हैं। पूरे संवाद में संघ प्रमुख ने युवाओं को सामाजिक सरोकारों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा दी।