शारदा चरण खटुआ हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराए जाने की मांग संबंधी याचिका को हाईकोर्ट से वापस लेने के लिए पुलिस दबाव बना रही है। ऐसा आरोप लगाते हुए परिजनों ने पुलिस महानिरिक्षक से शिकायत की है।
देश की पहली स्वदेशी आर्टलरी गन धनुष आर्टलरी की जांच में सीबीआई ने जीसीएफ में पदस्थ जूनियर वर्कर्स मैनजर शारदा चरण खटुआ को तलब किया था। जिसके बाद उसकी हत्या कर दी गई और लगभग दो साल गुजर जाने के बावजूद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। हत्याकांड की जांच सीबीआई से करवाए जाने की मांग करते हुए उसकी पत्नी से हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट भी पुलिस की कार्यवाही पर नाराजगी व्यक्त करते हुए तीन बार पुलिस अधीक्षक को तलब कर चुका है। हाईकोर्ट में दायर याचिका को वापस लेने के लिए पुलिस दवाब बना रही है। ऐसा आरोप लगाते हुए परिजनों ने पुलिस महानिरिक्षक से शिकायत की है।
पीड़ित विधवा महिला मौसमी खटुका ने बताया कि उनके पति एससी खटुका गन कैरिज फैक्टरी में जूनियर वर्क मैनेजर के पद पर पदस्थ थे। जीसीएफ को धनुष आर्टलरी गन 155 एमएम के निर्माण का प्रोजेक्ट मिला था। गन में उपयोग होने वाले वायरलैस रोलिंग बैरिंग का ठेका दिल्ली की सिद्धी सेल्स को दिया गया था। कंपनी द्वारा चायना मेड में मेड इन जर्मन की सील लगाकर वाला वायरलैस रोलिंग बैरिंग की सप्लाई की गई थी। दिल्ली सीबीआई ने इस संबंध में प्रकरण दर्ज कर जांच प्रारंभ की थी। सीबीआई ने उनके घर में दबिश दी थी। इसके बाद पूछताछ के लिए उनके पति को दिल्ली तलब किया था। फैक्टरी के महाप्रबंधक ने व्यक्तिगत तौर जाने की अनुमति दी थी। कानूनी सलाह के लिए वकील से मिलने उनके पति 17 जनवरी 2019 की सुबह घर से निकले थे, जो वापस नहीं लौटे। उनके लापता होने की रिपोर्ट उसी दिन घमापुर थाने में दर्ज करवाई गई थी। बीस दिन बाद उनके पति की क्षत-विक्षत लाश शासकीय निवास से एक किलोमीटर दूर पंप हाउस के पास 5 फरवरी को मिली थी। पूरा घटनाक्रम फैक्टरी क्षे़त्र का है, क्योंकि फैक्टरी क्षेत्र में मेन गेट में लगे सीसीटीवी कैमरे में उसके पति आते हुए दिखाई दे रहे थे।
पति की हत्या के तार धनुष आर्टलरी गन की सीबीआई जांच से जुड़े हुए हैं। हत्या के आठ माह गुजर जाने के बाद भी पुलिस आरोपियों को नहीं पकड़ पाई थी। पुलिस जांच में गैर जिम्मेदारी तथा लापरवाही बरत रही थी। जिसके कारण उन्होंने हत्याकांड की जांच सीबीआई को सौंपे जाने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई के दौरान पूर्व में हाईकोर्ट ने पुलिस अधीक्षक को तलब किया था। पिछले तीन बार से पुलिस अधीक्षक हाईकोर्ट में व्यक्तिगत उपस्थिति से बच रहे हैं।
हत्याकांड की जांच के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजय अग्रवाल की अध्यक्षता में दस सदस्यीय एसआईटी गठित की गई थी। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अग्रवाल ने गत दिनों घर में आकर अधिवक्ता बदलने के लिए आवेदन पर हस्ताक्षर करने को कहा था। मैंने अपना अधिवक्ता बदलने से स्पष्ट इंकार कर दिया था। उन्होंने बताया कि 21 दिसंबर को मेरे देवर तथा ससुर को एसआईटी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। इस दौरान एसआई प्रकरण को आत्महत्या बताते हुए केस वापस लेने दवाब बना रहे थे। इस संबंध में उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक उमेश जोश से फोन पर संपर्क कर शिकायत की है।
मौसमी खटुका के देवर आर खटुका ने बताया कि एसआईटी ने 21 दिसंबर की सुबह 10 बजे से लेकर रात्रि 10 बजे तक उनके पिता तथा उनसे पूछताछ की। जिन व्यक्तियों पर शंका व्यक्त की गई है उनका नार्को या पॉलीग्राफी टेस्ट होना चाहिए था। भाई की लाश मिलने की सूचना देने वाले 100 डायल के दो कर्मचारियों तक से पूछताछ नहीं की गई है। पुलिस प्रकरण को आत्महत्या का रूप देना चाहती है। पीड़ित परिजनों ने सर्वोच्य न्यायालय की शरण लेने की बात कही है।