चरनोई के लिए आरक्षित जमीन को शासकीय अभिलेख में हेराफेरी कर प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान तथा निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज किए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया है कि ऐसा करने से शासन को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि हुई है। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमठ तथा जस्टिस विजय कुमार शुक्ला की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता अनिल पटेल की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि डिंडोरी सुबखार में स्थित चरनोई की जमीन शासकीय अभिलेख में हेराफेरी कर अयोध्या प्रसाद बिलैया तथा रमादेवी शिक्षण सेवा समिति के नाम पर दर्ज की गई है। शासकीय अभिलेख के अनुसार साल 1930 में लगभग 23 हेक्टेयर जमीन चरनोई मद में दर्ज थी। साल 1955 के सर्वे के अनुसार लगभग 5 हेक्टेयर जमीन निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज कर दी गई। इसके लिए किसी प्रकार की कोई अनुमति नहीं ली गई थी। नियम विरुद्ध तरीके से भूमि का मद परिवर्तित कर दिया गया था।
इस संबंध में जब समाचार प्रकाशित हुए तो एसडीओ राजस्व ने अनावेदक अयोध्या प्रसाद तथा नीता बलैया को नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। अनावेदकों ने उक्त जमीन विक्रय-पत्र के आधार पर खरीदना बताया था। जिसके बाद एसडीओ ने राजस्व निरिक्षक को जांच के निर्देश दिए थे। राजस्व निरिक्षक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भूमि के मद परिवर्तन की अनुमति सक्षम प्राधिकरण द्वारा जारी नहीं की गई है। संबंधित व्यक्तियों ने चरनोई की जमीन निजी व्यक्तियों के नाम पर दर्ज करने के संबंध में कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए हैं। इसके अलावा साल 2017 में बायपास रोड के लिए कुछ भूमि का अधिग्रहण किया गया था। जिसके मुआवजे के लिए संबंधित संबंधित ने दावा प्रस्तुत किया था।
याचिका में मांग की गई थी कि प्राइवेट शैक्षणिक संस्थान तथा निजी व्यक्ति के नाम पर दर्ज करोड़ों रुपये की भूमि को शासकीय मद में दर्ज कर उन्हें बेदखल किया जाए। याचिका की सुनवाई करते हुए युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता राजेश च्रंद तथा अधिवक्ता काशी राम पटैल ने पैरवी की।