भेड़ाघाट के धुआंधार में शिल्पकारों द्धारा निर्धारित स्थलों के अलावा रास्तों पर अवैध रूप से कब्जा कर दुकानें लगाए जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। इसमें कहा गया कि सड़कों में अतिक्रमण किए जाने से पर्यटकों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जस्टिस शील नागू व जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की युगलपीठ ने बुधवार को मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात् अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
शिल्पकार संघ धुआंधार की तरफ से दायर याचिका में कहा गया है कि वो नगर पालिका द्वारा प्रदान की गई दुकानों में व्यापार करते हैं और उनका मुख्य कार्य संगमरमर की मूर्ति बनाकर बेचना है, जिससे उनका भरण पोषण होता है। आरोप है कि नगर पालिका एवं अन्य अनावेदक की लापरवाही से धुआंधार पहुंच मार्ग पर अनाधिकृत रूप से अतिक्रमण कर दुकान लगाकर रास्ता छोटा किया जाता है। पर्यटकों को असुविधा होती है और वो पालिका द्वारा बनाई दुकानों पर भी नहीं जा पाते हैं। इस बारे में बार-बार आवेदन देने पर भी कागजी कार्रवाई की गई, परन्तु समस्या का स्थायी हल नहीं निकल सका है।
याचिका में प्रार्थना की गई है कि कलेक्टर जबलपुर एवं अन्य धारा 133 सीआरपीसी, पोलिस एक्ट एवं नगर पालिका अधिनियम में दी शक्तियों का प्रयोग करते हुए सभी अतिक्रमण स्थायी रूप से हटाए और दुबारा होने पर दंडित करें। याचिका पर प्रमुख सचिव नगरीय विकास विभाग, संभागीय आयुक्त (राजस्व), जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक जबलपुर, थाना प्रभारी भेड़ाघाट व मुख्य नगर पालिका अधिकारी भेड़ाघाट नगर पंचायत को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा व लावण्या वर्मा ने पक्ष रखा।