जबलपुर हाईकोर्ट में उमरिया जिले की पाली क्षेत्रातंर्गत आदिवासी बाहुल्य सात गांवों में बिजली की सुविधा नहीं होने को चुनौती देते हुए जनहित याचिका दायर की गई थी। जस्टिस शील नागू व जस्टिस मनिंदर सिंह भट्टी की युगलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
उमरिया जिले की चौरई के कठई गांव निवासी कमलेश बैगा की तरफ से दायर याचिका में कहा गया कि देश को आजाद हुए 70 साल बीत चुके हैं, लेकिन उमरिया जिले के उक्त जामुही, संस, चिकनी, कठई, गुनरौला व पटपरिहा, मकाउ गांवों में आज तक बिजली की आपूर्ति नहीं की गई है। जिससे उक्त गांव के बच्चों को पढ़ाई तो किसानों को खेती किसानी के काम में भारी परेशानी उठानी पड़ती है। कई मर्तबा उक्त मामले को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों को आवेदन दिए गए, लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिस पर हाईकोर्ट की शरण ली गई है। मामले में मप्र शासन के प्रमुख सचिव, आदिवासी कल्याण मंत्रालय के सचिव, ऊर्जा मंत्रालय के सचिव, कलेक्टर उमरिया व एसडीओ पाली को पक्षकार बनाया गया है। मामले की प्रारंभिक सुनवाई पश्चात न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्त नवल किशोर गुप्ता ने पक्ष रखा।