आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर आयोजित किए गए सूर्य कार्यक्रम को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। याचिका में गणतंत्र दिवस पर तिरंगे के सामने सूर्य नमस्कार के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए शैक्षणिक संस्थानों को बाध्य किए जाने को चुनौती दी गई थी। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पीके कौरव की युगलपीठ ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद याचिका पर अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद निर्धारित की है।
भोपाल से कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद की तरफ से दायर की गई याचिका में कहा गया था कि आजादी के अमृत महोत्सव आयोजन के तहत राष्ट्रीय योगासन स्पोर्ट फेडरेशन ने 1 जनवरी से 7 फरवरी तक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया है। देश के तीन राज्यों में 30 हजार संस्था तथा तीन लाख छात्रों को इसमें शामिल गया है। इस कार्यक्रम के तहत गणतंत्र दिवस के अवसर पर तिरंगे के सामने म्युजिकल सूर्य नमस्कार कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
याचिका में आरोप लगाते हुए कहा गया था कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने उच्च शिक्षा संस्थानों तथा संबध्द कॉलेजों को इस कार्यक्रम में शामिल होने के संबंध में नोटिफिकेशन जारी किया था। सूर्य नमस्कार को सूर्य पूजा माना जाता है। इस्लाम धर्म के अनुसार सूर्य की पूजा सही नहीं है। याचिका में हाईकोर्ट द्वारा पूर्व में पारित आदेश का हवाला देते हुए कहा गया था कि सूर्य नमस्कार में शामिल होना बंधककारी नहीं होकर स्वैच्छिक होना चाहिए। युगलपीठ द्वारा मंगलवार को प्रारंभिक सुनवाई के बाद उक्त निर्देश जारी किए। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता ई हाशमी तथा अधिवक्ता कु जी रसूद उपस्थित हुई।