रातापानी टाइगर रिजर्व से लगी करोड़ों की जमीन को कौड़ियों के भाव फाइव स्टार होटल, रिसॉर्ट, स्वीमिंग पूल जैसे अन्य निर्माण के लिए सस्ते दामों पर बेचने के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में कहा गया था कि जिस जमीन का आवंटन किया जा रहा है उसमें लगभग 25 हजार सागौन के पेड़ लगे हैं। जिनका मूल्य लगभग 100 करोड़ रुपये है, वहीं जमीन को महज दो करोड़ रुपये में बेचा जा रहा था। याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि विजय कुमार मलिमथ तथा जस्टिस पी के कौरव की युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता अचल सिंह की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि रातापानी टाइगर रिजर्व से लगी हुई सिहोर जिले की लगभग 50 लाख वर्गफुट जमीन पर्यटन विभाग ने तीन चरणों में फाईव स्टार होटल, रिसॉर्ट, स्वीमिंग पुल सहित अन्य प्रयोजन के लिए आवंटित की गई है, जिसे नियम विरुद्ध तरीके से मद परिवर्तन कर भूमि सरकार ने पर्यटन विभाग को दी थी। पर्यटन विभाग ने कौड़ियो के दाम भूमि सिर्फ दो करोड़ रुपये में आवंटित कर दी है। याचिका में कहा गया था कि रातापानी टाइगर रिजर्व की भूमि राजस्व रिकॉर्ड में निस्तार की भूमि के रूप में दर्ज थी। नियमानुसार निस्तार की भूमि का उपयोग जनहित में किया जाता है, तथा उसके मद परिवर्तन के लिए केन्द्र सरकार की अनुमति आवश्यक होती है। इसके अलावा वन विभाग ने भी भूमि को अपना बताते हुए सरकार को पत्र लिखा है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता राजेश पंचौली ने बताया कि याचिका में कहा गया है कि सरकार द्वारा भूमि को सीलिंग का बताया गया है और पर्टयन विभाग के आग्रह पर उसे प्रदान की गयी है। सीलिंग एक्ट के प्रावधानों के तहत भी जमीन का आवंटन व्यवसायिक उपयोग के लिए नहीं किया जा सकता है। याचिका में कहा गया है कि सिहोर जिले में पानी की कमी है। इसके बावजूद भी व्यावसिक उपयोग के लिए स्वीमिंग के निर्माण की अनुमति प्रदान करते हुए जमीन का आवंटन किया गया है। याचिका में प्रमुख सचिव पर्यटन, राजस्व व वन विभाग,कलेक्टर सिहोर, एमडी एमपीटीबी तथा केन्द्र पर्यावरण विभाग के सचिव को अनावेदक बनाया गया है। सुनवाई के बाद युगलपीठ ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।