इंदौर नगर की कई कॉलोनियों के गणेश पांडालों में वर्तमान सामाजिक कुरीतियों की झांकियां भी प्रदर्शित की गई हैं। अधिकतर स्थानों पर पर्यावरण अनुकूल मिट्टी से निर्मित गणेशजी की मूर्तियां विराजित की गई हैं। वहीं, शहर में बप्पा के अनूठे भक्त किशोर गहलोत हर साल गणेशजी की प्रतिमाओं को नए रूप और अंदाज में बनाते हैं। इस बार उन्होंने गणेशजी को अनाज से अन्नदेवता का रूप दिया है।
रॉक गार्डन के निर्माता नेकचंद सैनी से मिली प्रेरणा
चंडीगढ़ के पद्मश्री नेकचंद सैनी ने घर और बिजली विभाग की बेकार चीजों से प्रसिद्ध रॉक गार्डन निर्मित कर देश भर में अपनी एक अलग पहचान कायम की थी। इसी तर्ज पर इंदौर के अशोक नगर निवासी किशोर गहलोत ने दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली वस्तुओं से गणपति जी की प्रतिमा निर्मित करने का बीड़ा उठा रखा है। वे प्रतिवर्ष नया प्रयोग कर गणेश प्रतिमा का निर्माण करते हैं और विसर्जन के बजाय उस सामग्री को वितरित कर देते हैं।
गणेश जी की मूर्ति बनाने में अनूठा प्रयोग
इस वर्ष किशोर गेहलोत ने गणेश जी को अन्न देवता यानि माता अन्नपूर्णा के पुत्र के रूप में विभिन्न अनाज से निर्मित किया है। गणेश जी की आकृति बनाने में उन्होंने प्राकृतिक और कृषि आधारित सामग्री जैसे गेहूं की बाली, गेहूं, दाल, चावल, चना, राजमा, जूट, मसूर, उड़द, फल के रूप में बच्चों के खिलौने, नकली फल आदि का प्रयोग किया है। गेहलोत का कहना है कि मध्य प्रदेश सात बार कृषि कर्मण पुरस्कार प्राप्त कर चुका है। गेहूं के साथ दलहन के उत्पादन में भी प्रदेश अग्रणी है, इसलिए इस बार गणेशजी को अन्न देवता का आकार दिया है।
औषधि से बैद्यनाथ स्वरूप में बनाए थे गणेशजी
वर्ष 2024 में गेहलोत ने बुद्धि और विलास के देवता गणेश जी की प्रतिमा को आयुर्वेद, होम्योपैथ और एलोपैथी दवाओं से वैद्यनाथ का कलात्मक रूप दिया था। इसमें उन्होंने इंजेक्शन, निडिल, आयुर्वेद की जड़ीबूटियों का उपयोग किया था। गणेश जी के निर्माण में प्रयुक्त दवाइयां गेहलोत स्वयं खरीदते हैं और विसर्जन को भी प्रतीकात्मक रूप से कर सभी दवाइयां जरूरतमंद व्यक्ति, संस्था या किसी अस्पताल में दे दी, ताकि उनका उपयोग सही स्थान पर हो सके। इस कार्य में उनका पूरा परिवार उनकी मदद करता है, ताकि वे प्रतिवर्ष अपने आराध्य को कुछ नया रूप दे सकें।
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पहले भी कर चुके नए प्रयोग
किशोर गेहलोत प्रतिवर्ष गणेश प्रतिमा को नया स्वरूप देते हैं। इससे पहले उन्होंने साइकिल के कलपुर्जे अलग कर उसके विभिन्न हिस्सों को जोड़कर गणेश प्रतिमा निर्मित की थी। यह स्वरूप देने के लिए उन्होंने तीन नई साइकिलें खरीदीं और विसर्जन के बाद साइकिल के पुर्जों को जुड़वाकर जरूरतमंद को भेंट कर दी थी। इस तरह बच्चों के खिलौने, सिक्के, नारियल, कलेवा का धागा, पर्यावरण, वाद्य यंत्र आदि से नए प्रयोग कर गणेशजी की प्रतिमाएं निर्मित कर चुके हैं। यह कार्य वे पिछले 25 वर्षों से वे लगातार कर रहे हैं।
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बुद्धि के देवता की भक्ति में करते हैं नवाचार
गेहलोत बताते हैं कि वे यह नवाचार बच्चों को भारतीय संस्कृति और कुछ कलात्मकता सिखने की प्रेरणा देने के लिए करते हैं। किशोर गेहलोत कहते हैं कि गणेशजी बुद्धि के देवता हैं, इसलिए वे कुछ न कुछ नई थीम सोचते हुए परिवार के साथ निर्णय लेकर हर साल बप्पा को नए स्वरूप में बनाते हैं। वे नौकरीपेशा हैं और इस कार्य के लिए अतिरिक्त समय देकर अपनी भक्ति और कला का परिचय देते हैं। खजराना गणेश मंदिर में पूजन कर गणेशजी को नए स्वरूप में निर्मित करने का श्रीगणेश करते है।