इंदौर के चिड़ियाघर में हाल ही में सफेद बाघिन ने तीन शावकों को जन्म दिया था। इनमें से एक शावक व्हाइट मेलेनिस्टिक है और दूसरा ब्लैक मेलेनिस्टिक। यह दोनों ही शावक अपने आप में खास है। जहां व्हाइट मेलेनिस्टिक शावक दुनिया का अपनी तरह का इकलौता बाघ है, वहीं ब्लैक मेलेनिस्टिक बाघ देश का चौथा है।
बाघ विशेषज्ञों का कहना है कि गहरी काली धारियों वाले बाघ को मेलेनिस्टिक टाइगर कहा जाता है। शरीर पर पीली या सफेद चमड़ी पर जब गहरी काली धारियां इन बाघों को खास बनाती है और झाड़ियों में छिपने में मददगार होती है। चिड़ियाघर के प्रभारी डॉ. उत्तम यादव का कहना है कि रेसेसिव जीन या मेलेनिन की वजह से यह धारियां बनती हैं। जिस बाघ की चमड़ी सफेद हो और गहरी धारियां हो तो उसे व्हाइट मेलेनिस्टिक टाइगर कहा जाता है। इसी तरह चमड़ी पीली हो और गहरी धारियां हो तो उसे यलो मेलेनिस्टिक टाइगर। यह दुर्लभ है। अगर इंदौर में व्हाइट मेलेनिस्टिक टाइगर की बात करें तो यह दुनियाभर में अपनी तरह का इकलौता बाघ है। वहीं, यलो मेलेनिस्टिक टाइगर देश का चौथा बाघ है।
इंदौर-भोपाल बने प्रमुख ब्रीडिंग सेंटर
इंदौर चिड़ियाघर में हो रहे प्रयोगों की वजह से यह बाघों का प्रमुख ब्रीडिंग सेंटर बन चुका है। यहां 2009 में सिर्फ दो बाघ थे, जो अब बढ़कर 14 हो चुके हैं। 2010 में सीता बाघिन यहां आई और तब से लगातार कुनबा बढ़ता ही जा रहा है।
2014 में भी हुआ था विलक्षण प्रयोग
इंदौर के चिड़ियाघर में 2014 में सीता बाघिन से जन्मा लकी मां का दूध नहीं पी रहा था। तब लेब्राडोर डॉग का दूध उसे पिलाया गया। डॉग के बच्चे और शावक को तीन महीने तक साथ रखा गया। आज यह लकी चिड़ियाघर के सबसे हेल्दी बाघों में से एक है। यह प्रयोग सफल रहा और अब कई जगहों पर इसे दोहराया गया है।