सार
देश के सबसे साफ शहर इंदौर की हवा में जहर घुल गया है। लोग परेशान हैं और पीएम5 और पीएम2.5 का स्तर आबोहवा में बढ़ता जा रहा है। यानी जमीन की सफाई काफी नहीं है, इंदौर को वायु प्रदूषण भी शून्य के स्तर पर लाना होगा।
इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है। एक-दो साल से नहीं बल्कि छह साल से। इसके बाद भी शहर की हवा में जहर घुला हुआ है। वायु गुणवत्ता सूचकांक बढ़ा हुआ है। इस दिशा में राज्य सरकार के सभी विभागों के साथ ही स्थानीय स्तर पर किए प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं। असर यह है कि लोगों की कतारें डॉक्टरों के क्लिनिक्स पर दिख रही हैं।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने इंदौर की वायु गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए एक्शन प्लान बनाने की जिम्मेदारी शहर के 14 विभागों को दी थी। इसके बावजूद शहर में प्रदूषण का स्तर वर्ष 2018 जैसा ही है। नवंबर माह में शहर का एक्यूआई 100 से ज्यादा है। 15 दिन से लगातार यह स्थिति है। ऐसे हालात पांच साल पहले भी थे। इसके अलावा शहर में धूल के कण और धुआं भी ज्यादा नजर आ रहा है, जो शहरवासियों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
इंदौर नगर निगम में भाजपा की नई परिषद जब काबिज हुई थी तो मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा था कि हम शहर की हवा में भी सुधार लाएंगे। अभी तक इस मामले में कोई ठोस कदम नगर निगम ने नहीं उठाए हैं। 18 नवम्बर को वायु गुणवत्ता निगरानी समिति की बैठक है। इसमें शहर में बढ़ रहे प्रदूषण का मुद्दा उठ सकता है।
यह है इंदौर में प्रदूषण की वजह
- कोरोना काल के बाद शहर में चार पहिया वाहनों की संख्या ज्यादा हो गई है।
- हरियाली का प्रतिशत मास्टर प्लान में भले ही 14% हो लेकिन 10 प्रतिशत से भी कम हरियाली शहर में बची है। पेड़ कम होते जा रहे हैं।
- सांवेर रोड, पालदा में कई ऐसे कारखाने है जो शहर में प्रदूषण फैलाते है।
- शहर में होने वाली निर्माण कार्यों के कारण में काफी धूल उड़ती है। निर्माण के समय प्रदूषण कम करने वाले उपायों का ध्यान रखने की जरूरत है।