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इंदौर: यूजीसी के समानता विनियम सर्कुलर को संघ ने बताया असंतुलित, कहा-सरकार कर रही समीक्षा

Sun, 01 Nov 2026 08:15 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर

सार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने यूजीसी के समानता विनियम-2026 को असंतुलित बताते हुए कहा है कि सरकार इसकी समीक्षा कर रही है। संघ के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इंदौर में कहा कि नियमों पर न्यायालय ने भी रोक लगाई है। उन्होंने भविष्य के फैसले में सभी पक्षों का संतुलन सुनिश्चित करने की बात कही।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, UGC - फोटो : X(@ugc_india)
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विस्तार
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा जारी समानता विनियम सर्कुलर को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने असंतुलित करार दिया है। संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा कि न्यायालय ने भी इस सर्कुलर पर रोक लगाई है और सरकार भी पूरे मामले की समीक्षा कर रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर भविष्य में जो भी निर्णय आए, वह पूरी तरह संतुलित होना चाहिए और सरकार को यह संतुलन सुनिश्चित करना आवश्यक है। आंबेकर ने यह भरोसा जताया कि भारतीय समाज इतना कमजोर नहीं है जो किसी एक सर्कुलर मात्र से प्रभावित हो जाए या हिल जाए, इसलिए समाज को एकजुट रहना चाहिए।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने इंदौर में होने वाली तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की बैठक से पहले पत्रकार वार्ता में यह बात कही। उन्होंने देश में युवाओं और जन जी (Gen Z) के आंदोलनों से जुड़े एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा कि जब भी देश में कोई अपनी आवाज उठाता है, तो संघ को राजनीतिक पक्ष या विपक्ष के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी पक्षों को यह ध्यान रखना अनिवार्य है कि देश में होने वाला कोई भी आंदोलन पूरी तरह देशहित में ही संचालित हो। आंबेकर ने कहा कि ऐसे मामलों में सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है और संघ स्वयं इस बात का पूरा ध्यान रखता है तथा आगे भी रखेगा।

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समानता विनियम और विवाद का मुख्य कारण
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने चालू वर्ष के जनवरी माह में एक सर्कुलर जारी करके देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विनियम-2026 को लागू किया था। इस नए विनियम के अंतर्गत शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव को पूरी तरह रोकने के लिए 'समता समिति' (इक्विटी कमेटी) का गठन करना अनिवार्य कर दिया गया। आयोग के प्रावधानों के अनुसार, इस समता समिति में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी), अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) के प्रतिनिधियों के अलावा दिव्यांगजन और महिलाओं को शामिल करना अनिवार्य बनाया गया है।
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इस सर्कुलर के लागू होने के बाद से ही सामान्य वर्ग के विभिन्न संगठनों ने इन नियमों पर अपनी कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है। सामान्य वर्ग के संगठनों का तर्क है कि यूजीसी के नए नियमों में सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के हितों के संरक्षण का कोई स्पष्ट प्रविधान नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त, समता समिति के समक्ष झूठी शिकायत दर्ज कराने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध किसी प्रकार की दंडात्मक या अनुशासनात्मक कार्रवाई का भी कोई उल्लेख नहीं है। संगठनों का कहना है कि इन नियमों का अनुचित दुरुपयोग हो सकता है, जिससे शिक्षण संस्थानों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
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