दिव्यांग तैराक सत्येंद्र सिंह ने 72 किमी की मैराथन तैराकी पूरी कर देश का नाम रोशन किया है। यह तैराकी लंदन से फ्रांस और फ्रांस से लंदन तक थी। इस रिले तैराकी में उन्होंने छह दिव्यांग तैराकों के दल का नेतृत्व किया। सत्येंद्र ने अपनी टीम के साथ 18 जुलाई को यूके में डोबर समुद्रतट से स्थानीय समयानुसार रात्रि 3.17 मिनट पर तैराकी शुरू की। यहां से टीम फ्रांस के वेसेंट समुद्रतट पर शाम को 5.17 मिनट पर पहुंची। यहां से वापस यूके के डोबर समुद्रतट के लिए टीम ने तैराकी शुरू की। टीम 19 जुलाई को स्थानीय समयानुसार 10.40 मिनट पर वापस यूके पहुंची। इस तरह 31 घंटे 29 मिनट में टीम ने कुल 70 किमी की दूरी तय की। इंदौर में वाणिज्यकर विभाग में पदस्थ सत्येंद्र मूलत: मप्र के भिंड के रहने वाले हैं।
कभी भी बदल जाता है मौसम
सत्येंद्र ने इससे पहले 24 जून 2018 को इंग्लिश चैनल एक ओर तैरकर पार किया था। तब 12 घंटे 26 मिनट में वे लंदन से फ्रांस तक गए थे। अब अपनी टीम के साथ दोनों ओर की दूरी पार की है। समुद्र में कई चैनलों को तैराकों ने पार किया है, जिनमें यह इंग्लिश चैनल दुनिया में सबसे मुश्किल माना जाता है। यहां पता नहीं होता है कि कब मौसम बदल जाए।
मछलियों ने काटा, बारिश होने लगी
सत्येंद्र ने बताया कि रास्ते में मछलियों ने भी काटा। खासकर जैली फिश ने बहुत परेशान किया। यह मछली चिपक जाती है। इसकी रगड़ लगने से त्वचा पर जलन और खुजली होती है। लहरों और वर्षा से भी परेशानी होती है। वापस लौटते समय मौसम कुछ खराब हुआ और वर्षा होने लगी। जिससे परेशानी बढ़ी। इस दौरान समुद्र में तापमान 14 डिग्री था। यहां ठंडे पानी में तैरना खासा मुश्किल था।
कई सम्मान हासिल कर चुके सत्येंद्र
वर्ष 2020 में सत्येंद्र को तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार मिला था। उन्हें तात्कालीन राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने यह सम्मान दिया था। यह सम्मान हासिल करने वाले वे देश के पहले दिव्यांग तैराक बने थे।
जन्म के 15 दिन बाद शरीर का निचला हिस्सा दिव्यांग हुआ
सत्येंद्र का जन्म सामान्य बच्चे की तरह हुआ था, लेकिन जन्म के 15 दिन बाद बीमारी के कारण शरीर का निचला हिस्सा दिव्यांग हो गया। ऐसे हालात में बहुत से लोग निराश हो जाते हैं, लेकिन सत्येंद्र ने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने तैराकी का प्रशिक्षण प्रारंभ किया। वे पैरा तैराकी में अब तक 28 राष्ट्रीय पदक जीत चुके हैं जबकि चार अंतररष्ट्रीय पदक भी हासिल किए हैं।