प्रदेश सरकार द्वारा अतिथि विद्वानों को दी गई सौगात का नए अभ्यार्थियों ( अभिनव विद्वानों) ने विरोध किया है। उनका कहना है कि ज्यादातर अतिथि विद्वान मध्य प्रदेश के मूल निवासी नहीं है। अतिथि विद्वानों की तुलना में नए अभ्यार्थी योग्याता में ज्यादा आगे है।
ज्यादातय अभ्यार्थी पीएचडी उपाधि प्राप्त है और राष्ट्रीय परीक्षा में भी पास हो चुके है। अतिथि विद्वानों को दी गई सुविधा से नए अभ्यार्थियों का नुकसान होगा,क्योकि ज्यादातर अतिथि विद्वान सहायक प्राध्यापक परीक्षा भी पास नहीं कर पाए और वे यूजीसी के मापदंडों पर भी खरे नहीं उतरते है।
मंगलवार को नए अभ्यार्थियों ने कलेक्टर कार्यालय पर प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया। इस दौरान उन्होंने नारेबाजी कर अपना विरोध जताया। उनका कहना है कि
हाल ही में हाल ही में सेट परीक्षा 1.10 लाख अभ्यार्थियों ने दी और 20 हजार से अधिक ने नेट परीक्षा भी पास की है। उनके साथ पक्षपात नहीं होना चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि अतिथि विद्वानों का वेतन 50 हज़ार से और अधिक भी कर देते तो हम उसका हम स्वागत करते हैं, परन्तु परीक्षा की प्रक्रिया पारदर्शी रखी जाए , किसी भी अतिथि विद्वान को कोई लाभ नहीं दिया जाना चाहिए । जो योग्य थे 2018 की परीक्षा पास कर गए। अगर इनमें योग्यता है तो साथ में परीक्षा दें और बिना किसी अतिरिक्त लाभ के पास करें। यदि हमारे साथ सरकार ने अन्याय किया तो फिर उग्र प्रदर्शन किया जाएगा।