नर्मदा के जल से शहर की 40 टंकियां रोज भरी जाती है। इसके अलावा यशंवत सागर तालाब से छह टंकियां भरी जाती है। 1978 में नर्मदा का पहला चरण आया था। इसके बाद दो अन्य चरणों से नर्मदा का पानी इंदौर पहुंचाया गया।
नर्मदा जयंती पर शनिवार को हजारों लोग नदी के तट पर पूजा अर्चना और स्नान करने ओंकारेश्वर, महेश्वर पहुंचे, लेकिन इंदौरवासी खुशकिस्मत है,क्योकि नर्मदा 45 वर्षों से रोज उनकी प्यास बुझाने आती है। विद्यापर्वत माला के पहाड़ों को लांघ कर 65 किलोमीटर का सफर तय कर रोज इंदौर मां नर्मदा का अचमन करता है। जिस दिन यह क्रम टूटता है,उस दिन शहरवासी हैरान-परेशान हो जाते है। आईए जानते है नर्मदा और इंदौर से जुड़ी कुछ रोचक बातें
नर्मदा लाने के लिए चला था आंदोलन
70 के दशक में इंदौर में सूखा पड़ा था। इसके बाद नर्मदा का पहला चरण लाने की मांग शहर से उठी थी, लेकिन तब यह काम कठिन माना जा रहा था। सरकार इस प्रोजेक्ट के लिए तैयार नहीं थी, लेकिन शहरवासियों ने नर्मदा के पहले चरण के लिए आंदोलन किया। मुकुंद कुलकर्णी, अभय छजलानी, चंद्रप्रभाष शेखर, राकेश शर्मा, उपेंद्र शुक्ला, सुभाष कर्णिक, सुभाष कर्णिक,शशिकांत शुक्ला, नरेंद्र कश्यप, नूर मोहम्मद सहित कई शहरवासियों ने आंदोलन की रुपरेखा तैयार की। एक माह तक आंदोलन चला। इंदौर बंद का आह्वान किया गया। सामाजिक कार्यकर्ता शिवाजी मोहिते बताते है कि तब एक पहलवान ने मालवा मिल पर एक माह तक एक पैर पर खड़ा था। आंदोलन के बाद तत्कालीन सरकार झुकी और नर्मदा के पहले चरण की योजना को मंजूरी दी। 1978 में नर्मदा के पहले चरण का पानी इंदौर पहुंचा था। तब समारोह में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई भी शामिल हुए थे।