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MP Election: कांग्रेस के गढ़ चुरहट में BJP ने लगाई सेंध, अर्जुन सिंह और लॉटरी कांड भी रहे इस सीट की पहचान

सार

चुरहट विधानसभा क्षेत्र 1967 से अस्तित्व में आया इससे पूर्व मझौली के अंतर्गत था। 1961 की जनगणना के बाद हुए परिसीमन में इस सीट का उदय हुआ। अर्जुन सिंह मझौली से 1957 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए थे।
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चुरहट सीट पर कांग्रेस 9 बार जीत चुकी है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश की राजनीति का केंद्र बिंदु रहा विंध्य प्रदेश का चुरहट विधानसभा क्षेत्र बहुचर्चित रहा है। चुरहट का नाम आते ही पूर्व सीएम, राज्यपाल व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्व. अर्जुन सिंह, उनके पुत्र व पूर्व मंत्री अजय सिंह राहुल भैया या चुरहट लॉटरी कांड का स्मरण हो जाता है। ये तीनों नाम कभी प्रदेश के राजनैतिक पटल पर चमकते रहे। यह सीट अर्जुन सिंह और कांग्रेस का गढ़ रही है। विंध्य पर्वत माला के श्रेणी और सोन नदी से आच्छादित यह इलाका सीधी जिले का एक विधानसभा क्षेत्र है।
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1967 से अस्तित्व में है सीट
चुरहट विधानसभा क्षेत्र 1967 से अस्तित्व में आया इससे पूर्व मझौली के अंतर्गत था। 1961 की जनगणना के बाद हुए परिसीमन में इस सीट का उदय हुआ। अर्जुन सिंह मझौली से 1957 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में खड़े हुए थे और प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के जगत बहादुर सिंह आर्य को 1225 मतों से पराजित कर विजयी हुए। 1962 में पुनः अर्जुन सिंह मझौली से कांग्रेस के टिकट पर खड़े हुए और विजयी रहे।

प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सीपी तिवारी से हारे थे अर्जुन सिंह
जब 1967 में चुरहट विधानसभा क्षेत्र के पहले चुनाव हुए तो प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के सीपी तिवारी से अर्जुन सिंह पराजित हो गए। इसके बाद 1972 में अर्जुन सिंह सीधी से चुनाव लड़े और 31,802 मतों से विजय रहे। शेष सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी। 1977 में जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में हुए आंदोलन से और आपातकाल के विरोध का गुस्सा मतदाताओं में था, फिर भी 1977 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अर्जुन सिंह विजयी रहे। उन्होंने जनता पार्टी के जगतबहादुर सिंह को पराजित किया जो एक रिकॉर्ड था।
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1998 में अजय सिंह ने संभाला मैदान
1977 से 1990 तक अर्जुन सिंह चुरहट से विजयी होते रहे। वर्ष 1998 में अर्जुनसिंह के पुत्र अजयसिंह राहुल भैया मैदान में आए और विजयी रहे। वे 2013 तक लगातार विजयी होते रहे, लेकिन वर्ष 2018 में भाजपा के शारदेंदु तिवारी से पराजित हो गए। 1993 में भाजपा को मिली विजय के बाद 2018 में जीती मिली, यानी 26 साल भाजपा को चुरहट में जीत के लिए इंतजार करना पड़ा, किंतु कांग्रेस के मजबूत गढ़ में सेंध लगाने में भाजपा कामयाब हो गई। चुरहट में जातीय समीकरण को साधते हुए चुनाव में विजय प्राप्त होती है।

फिर शारदेंदु व अजय सिंह में मुकाबला
विधानसभा चुनाव 2023 में भाजपा से फिर शारदेंदु तिवारी तो कांग्रेस से अजय सिंह उम्मीदवार हैं। देखना है कि क्या कांग्रेस अपना किला भाजपा से फिर हासिल करने में कामयाब होती है या नहीं।
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12 चुनाव, नौ बार कांग्रेस, दो बार भाजपा जीती
  • चुरहट में अभी तक 12 चुनाव में 9 कांग्रेस, दो भाजपा और एक बार प्रजा सोशलिस्ट पार्टी विजय हुई है।
  • अर्जुन सिंह और अजय सिंह राहुल भैया चार-चार बार इस क्षेत्र से विजयी हो चुके हैं।
  • अर्जुन सिंह की सबसे बड़े विजय 1985 में 35,595 मतों से हुई थी।
  • सर्वाधिक मतदान 1967 में 73.61 प्रतिशत हुआ था न्यूनतम मतदान वर्ष 1977 में 54.87 प्रतिशत दर्ज किया गया था।

 
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