मप्र में विधानसभा चुनाव की तारीखें तय होते ही MP Election 2023 के लिए सभी पार्टियों ने कमर कस ली है। सोमवार को भाजपा ने प्रदेश की 57 सीटों पर अपने दावेदारों की सूची जारी कर दी है। इसमें मालवा निमाड़ की 14 सीटें भी शामिल हैं। इनमें से कई सीटों पर दलबदल की राजनीति का बड़ा असर दिखेगा। पिछले उपचुनाव के समय ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में आए कई बड़े नाम इन्हीं सीटों से आते हैं। इसके साथ भंवरसिंह शेखावत, दीपक जोशी, समंदर पटेल जैसे नामों का भी पार्टियां बदलने का चुनाव में असर दिखेगा।
देवास सीट पर पिछले छह चुनाव से एक ही परिवार का कब्जा
देवास सीट पर पिछले छह चुनाव से भाजपा का ही कब्जा है। यह सीट तुकोजी राव पवार के नाम से जानी जाती है। वह यहां से लगातार 6 बार यहां पर चुने गए हैं और तुकोजी राव पवार का नाता शाही खानदान से रहा है। पहली बार उन्होंने 1990 के चुनाव में जीत हासिल की थी, उसके बाद वह लगातार इस सीट पर चुने जाते रहे। 2015 में तुकोजी राव का निधन हो गया, जिसके चलते उपचुनाव में उनकी पत्नी गायत्री राजे पवार ने जीत हासिल की। फिर 2018 के चुनाव में भी उन्होंने ही जीत दर्ज की। 2018 विधानसभा चुनाव में गायत्री राजे पवार को 103, 456 वोट मिले थे और कांग्रेस के जयसिंह ठाकुर को 75,469 वोट मिले थे। गायत्री राजे ने उन्हें एक आसान मुकाबले में 27,987 मतों के अंतर से हरा दिया था।
कांग्रेस
इस सीट पर कांग्रेस ने अभी तक कोई भी दावेदार का नाम घोषित नहीं किया है। कांग्रेस में यहां से प्रदीप चौधरी और प्रवेश अग्रवाल के नाम चल रहे हैं।
हाटपीपल्या में दलबदल के कारण बढ़ गया रोमांच
हाटपिपल्या विधानसभा सीट से ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थक मनोज चौधरी को टिकट दिया गया है। वे 2020 में प्रदेश की राजनीति में हुए दलदबल में ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। साल 2018 के विधानसभा चुनाव में हाटपिपल्या सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मनोज नारायण सिंह चौधरी ने बीजेपी के दीपक कैलाश जोशी को कड़े मुकाबले में 13,519 मतों के अंतर से हरा दिया था लेकिन 2020 में यहां पर दलबदल हो गया और पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ 22 विधायकों ने कांग्रेस से बगावत कर दिया। ये लोग बाद में बीजेपी में शामिल हो गए जिससे यहां पर उपचुनाव कराए गए। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले मनोज चौधरी को 84,405 वोट मिले। उनके खिलाफ मैदान में उतरे कांग्रेस के कुंवर राजवीर सिंह राजेंद्र सिंह बघेल को 70,501 वोट मिले। मनोज चौधरी ने 13,904 मतों के अंतर से यह उपचुनाव जीत लिया।
कांग्रेस
कांग्रेस ने किसी का टिकट तय नहीं किया है। कुछ दिन पहले कमलनाथ सरकार में मंत्री रहे सज्जन सिंह वर्मा ने हाटपिपलिया सीट पर पूर्व विधायक राजेंद्र सिंह बघेल के बेटे राजवीर सिंह बघेल को टिकट देने की घोषणा कर दी थी। इस बात पर कांग्रेस शहर अध्यक्ष मनोज राजानी और विश्वजीत सिंह चौहान में तीखी नोकझोंक हो गई थी।
खातेगांव में गोंडवाना के वोट रहते हैं निर्णायक
2018 के चुनाव में यहां पर मुकाबला त्रिकोणीय रहा था। यहां पर 11 उम्मीदवारों ने चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन बीजेपी, कांग्रेस और गोंडवाणा गणतंत्र पार्टी के बीच मुकाबला हुआ। बीजेपी के आशीष गोविंद शर्मा को 71,984 वोट मिले तो कांग्रेस के ओम पटेल के खाते में 64,212 वोट आए। जबकि गोंडवाणा गणतंत्र पार्टी के मोहन पटेल को 19,004 वोट मिले थे। कड़े मुकाबले में बीजेपी के आशीर्ष शर्मा ने 7,772 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी।
कांग्रेस
यहां से कांग्रेस के दीपक जोशी का नाम चल रहा है। वे क्षेत्र में संपर्क के लिए भी सक्रिय हैं। अभी तक कांग्रेस ने किसी का नाम तय नहीं किया है। दीपक जोशी के अलावा यहां से मनीष चौधरी और गौतम बंटू का नाम भी चल रहा है।
हरसूद में विजय शाह का कोई तोड़ नहीं तलाश पाया
1990 से लगातार यहां से भाजपा जीतती आ रही है। भाजपा के कुंवर विजय शाह यहां के विधायक हैं। शाह भाजपा के लिए एक ऐसा चेहरा बनकर उभरे हैं, जिनकों हराने का फॉर्मूला अभी तक कांग्रेस ढूंढ नहीं पाई है। हरसूद विस सीट से विजय शाह 7वीं बार विधायक हैं। 2018 के चुनाव की बात करें तो तब के चुनाव में 8 उम्मीदवार थे, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच ही था. बीजेपी के कुंवर विजय शाह को चुनाव में 80,556 वोट मिले तो कांग्रेस के सुखराम साल्वे के खाते में 61,607 वोट आए। विजय शाह ने आसान मुकाबले में 18,949 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
कांग्रेस
हरसूद में इस बार कांग्रेस की तरफ से सुखराम साल्वे, आरएन ठाकुर, सुरेश पंवार के नाम चल रहे हैं। यहां से भी कांग्रेस ने अभी नाम तय नहीं किया है।
बड़वानी में निर्दलीय की भूमिका बेहद अहम
2018 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रेम सिंह पटेल को जीत मिली थी। उस चुनाव में मुकाबला त्रिकोणीय रहा। तब चुनाव में बीजेपी के प्रेम सिंह को 88,151 वोट मिले थे जबकि निर्दलीय प्रत्याशी रंजन मांडलोई के खाते में 49,364 वोट आए थे। कांग्रेस के रमेश पटेल को 34,084 वोट मिले। प्रेम सिंह को 38,787 मतों के अंतर से जीत मिली।
कांग्रेस
कांग्रेस से यहां पर राजन मंडलोई, मनेंद्र सिंह पटेल और मकन सिंह सोलंकी दावेदारी कर रहे हैं।
बदनावर में दलबदल वाले नेताओं की धाक
यहां 1977 से अब तक 11 बार चुनाव हो चुके हैं, जिसमें 5 बार कांग्रेस और 5 बार भाजपा को जीत मिली है, जबकि एक बार जनता पार्टी को मिला है। आखिरी चुनाव की बात करें तो भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में उतरे राजवर्धन सिंह ने कांग्रेस के कद्दावर नेता कमल सिंह पटेल को 32,133 वोटों से हराया था। दत्तीगांव को 99,137, जबकि पटेल को 67,004 वोट मिले थे। यहां 3 बार के विधायक राजवर्धन सिंह दत्तीगांव सिंधिया के साथ कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए हैं।
कांग्रेस
कांग्रेस की तरफ से अब यहां पर भंवर सिंह शेखावत, डाक्टर अभिषेक राठौर, हरिनारायण सिंह पंवार, प्रभा गौतम के नाम चल रहे हैं। शेखावत भी भाजपा को छोड़कर कांग्रेस में आए हैं और यहां से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं।
इंदौर 2 का किला भेदने की चुनौती
विधानसभा सीट पर 2018 के चुनाव में 9 उम्मीदवारों ने अपनी चुनौती पेश की थी लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहा। बीजेपी के रमेश मेंदोला को 138,794 वोट मिले तो कांग्रेस के सेंगर को 67,783 वोट मिले। जबकि नोटा में 2,951 वोट पड़े। यह सीट भाजपा के कब्जे वाली सीट मानी जाती है। इसे भाजपा का किला कहा जाता है। रमेश मेंदोला को यहां से चौथी बार टिकट दिया गया है।
कांग्रेस
इस सीट से कांग्रेस के चिंटू चौकसे दावेदारी कर रहे हैं।
इंदौर 4 में मालिनी को भी चौथी बार मिला मौका
2018 मालिनी गौड़ ने 43 हजार 90 वोट से सुरजीत सिंह चड्ढा को हराया। वे तीन बार यहां से विधायक रह चुकी हैं। इससे पहले उनके पति लक्ष्मणसिंह गौड़ यहां से चुनाव जीत चुके थे। पार्टी ने मालिनी गौड़ पर चौथी बार भी भरोसा जताया है। मालिनी गौड़ शहर की महापौर भी रह चुकी हैं।
कांग्रेस
यहां से कांग्रेस के अक्षय कांति बम, राजा मंगवानी और मुकेश सचदेव दावेदारी कर रहे हैं।
सांवेर में सिंधिया के खास तुलसी की परीक्षा
2020 में सांवेर सीट के लिए उप चुनाव में भाजपा प्रत्याशी तुलसी राम सिलावट ने कांग्रेस के प्रेमचंद गुड्डू को 53,264 वोट से पराजित किया था। यहां से अब तक सबसे ज्यादा 7 बार कांग्रेस, 6 बार भाजपा, एक बार जनसंघ और एक बार जनता पार्टी का उम्मीदवार जीता है। तुलसी सिलावट ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कांग्रेस से भाजपा में आए हैं। उनके लिए यह सीट आसान नहीं है। यहां पर कांग्रेस का अच्छा वर्चस्व रहा है।
कांग्रेस
कांग्रेस की तरफ से यहां पर रीना बौरासी सेठिया और राजेंद्र मालवीय दावेदारी कर रहे हैं।
उज्जैन दक्षिण में भाजपा को बड़ी जीत की उम्मीद
2018 के चुनाव में यहां से कुल 12 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतरे थे, जिसमें भारतीय जनता पार्टी की ओर से उम्मीदवार डॉ. मोहन यादव को 78,178 मत प्राप्त हुए थे। जबकि कांग्रेस पार्टी की ओर से उम्मीदवार राजेंद्र वशिष्ठ को 59,218 मत प्राप्त हुए थे। इस विधानसभा चुनाव के परिणामों में भी भारतीय जनता पार्टी के डॉ. मोहन यादव को 18,960 वोटों से जीत हासिल हुई थी। इस बार भाजपा यहां से बड़ी जीत की उम्मीद कर रही है।
कांग्रेस
इस बार इस सीट से कांग्रेस के अजीत सिंह, राजेंद्र वशिष्ठ, चेतन यादव दावेदारी कर रहे हैं।
रतलाम शहर में भाजपा को चुनौतियां कम
2018 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो इस सीट पर 7 उम्मीदवारों ने अपनी चुनौती पेश की थी लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच था। बीजेपी के चैतन्य कश्यप को 91,986 वोट मिले तो कांग्रेस की प्रेमलता दवे के खाते में 48,551 वोट आए। एकतरफा मुकाबले में बीजेपी ने 43,435 मतों के अंतर से जीत हासिल की। चेतन कश्यप इस बार भी यहां से बड़ी जीत की उम्मीद कर रहे हैं।
कांग्रेस
कांग्रेस की तरफ से यहां पर मयंक जाट, पारस सकलेचा, प्रकाश प्रभु राठौड़ दावेदारी कर रहे हैं।
मंदसौर में भाजपा और कांग्रेस के बीच ही मुख्य मुकाबला
2018 के विधानसभा की बात करें तो मंदसौर सीट पर 8 उम्मीदवार आमने-सामने थे, लेकिन मुख्य मुकाबला बीजेपी और कांग्रेस के बीच रहा था। बीजेपी के यशपाल सिंह सिसोदिया को चुनाव में 102,626 वोट मिले तो कांग्रेस के नरेंद्र नहाटा के खाते में 84,256 वोट आए। सिसोदिया ने 18,370 मतों के अंतर से चुनाव में जीत हासिल की।
कांग्रेस
कांग्रेस की तरफ से यहां पर इस बार विपिन जैन, महेंद्र सिंह गुर्जर और दीपक सिंह चौहान दावेदारी पेश कर रहे हैं।
मल्हारगढ़ में कांटे की टक्कर
2018 के विधानसभा चुनाव के समय मल्हारगढ़ विधानसभा सीट पर 9 उम्मीदवार आमने-सामने थे, लेकिन यहां पर मुख्य मुकाबला बीजेपी के जगदीश देवड़ा और कांग्रेस के परशुराम सिसोदिया के बीच रहा। जगदीश देवड़ा के खाते में 99,839 वोट आए तो परशुराम सिसोदिया को 87,967 वोट मिले। देवड़ा ने 11,872 मतों के अंतर से यह जीत हासिल की। इस बार यहां पर कांटे की टक्कर की उम्मीद है।
कांग्रेस
कांग्रेस की तरफ से यहां पर श्यामलाल जोकचंद, परशुराम सिसौदिया, विजेश मालेचा, अशोक खिंची दावेदारी कर रहे हैं।
सुवासरा पर दलबदल का असर दिखेगा
सुवासरा विधानसभा सीट पर 2018 के चुनाव में कांग्रेस के हरदीप सिंह डंग ने बेहद कांटेदार मुकाबले में 350 मतों के अंतर से हराया था. चुनाव में 10 उम्मीदवार आमने-सामने थे लेकिन मुख्य मुकाबला कांग्रेस के हरदीप सिंह डंग और बीजेपी के राधेश्याम पटीदार के बीच रहा। हरदीप को चुनाव में 93,169 वोट मिले तो राधेश्याम के खाते में 92,819 वोट आए। इसके बाद प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर हुआ। कांग्रेस के विधायक बीजेपी में शामिल हो गए। इस वजह से यहां पर भी उपचुनाव कराना पड़ा। उपचुनाव में बीजेपी के टिकट पर हरदीप डंग ने सुवासरा सीट पर चुनाव लड़ा और कांग्रेस के राकेश पटीदार को 29,440 मतों के अंतर से हरा दिया।
कांग्रेस
इस बार कांग्रेस से यहां पर राकेश पाटीदार, ओमसिंह भाटी, जगदीश फौजी धनगर दावेदारी कर रहे हैं।
जावद में भाजपा का तोड़ तलाशने में लगी कांग्रेस
इस सीट की पहचान पूर्व मुख्यमंत्री वीरेंद्र कुमार सखलेचा के रूप में की जाती है। प्रदेश की इस हाई प्रोफाइल सीट पर अभी वीरेंद्र कुमार सखलेचा के बेटे ओम प्रकाश सखलेचा विधायक हैं और वह राज्य सरकार में मंत्री भी हैं। 2018 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो जावद सीट पर बीजेपी और कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर होती रही है। तब के चुनाव में 8 प्रत्याशियों ने अपनी दावेदारी पेश की थी लेकिन मुकाबला त्रिकोणीय हो गया। बीजेपी के ओम प्रकाश सखलेचा को 52,316 वोट मिला तो कांग्रेस के राजकुमार रमेशचंद्र अहिर के खाते में 48,045 वोट आए। निर्दलीय प्रत्याशी समंदर पटेल को 33,712 वोट मिले। बीजेपी के ओम प्रकाश ने 4,271 मतों के अंतर से जीत हासिल की।
कांग्रेस
अभी कांग्रेस की तरफ से यहां पर समंदर पटेल, राजकुमार अहीर, सत्यनारायण पाटीदार दावेदारी कर रहे हैं।