इंदौर नगर निगम को खतरों का खिलाड़ी कहें तो गलत नहीं होगा। शहर में 150 से ज्यादा खतरनाक मकान हैं, लेकिन बारिश से पहले उन्हें गिराने की कार्रवाई शुरू नहीं की गई है। हर साल मानसून के पहले मकानों के खतरनाक मकानों के हिस्सों को गिराया जाता है, ताकि कोई बड़ा हादसा न हो। इतना ही नहीं निगम की खुद की खतरनाक बिल्डिंग में भी दफ्तर लग रहे हैं। ऐसे में वहां काम करने वाले कर्मचारियों की जान पर संकट रहता है।
नगर निगम ने निजी मकान तो ठीक खतरनाक हो चुके सरकारी भवनों पर भी हथौड़े नहीं चलाए। इंदौर नगर निगम मुख्यालय में ही खतरनाक हो चुके हिस्से में दफ्तर संचालित हो रहे है। उस बिल्डिंग की छत का प्लास्टर गिर चुका है और सरिए नजर आ रहे हैं। इसके बावजूद उसे खाली नहीं कराया जा रहा है।
दस पंद्रह रुपये किराए के चक्कर में जान खतरे में
इंदौर में सबसे ज्यादा खतरनाक मकान, नंदलालपुरा, जवाहर मार्ग से सटे कोयला बाखल, जवाहर मार्ग, सराफा, छावनी इलाके में हैं। 30-40 साल पुराने किराएदार दस-पंद्रह रुपये प्रतिमाह किराए के चक्कर में जान दांव पर लगा रहे हैं। कई मकानों के केस प्रकरण कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए भी नगर निगम उन्हें तोड़ने से बचता है। आश्चर्य की बात यह है कि लोग भी खतरनाक मकानों में रहने से नहीं डरते हैं।
अति खतरनाक मकानों को गिराएंगे : राठौर
निगम की जनकार्य समिति के प्रभारी राजेंद्र राठौर का कहना है कि ज्यादातर अति खतरनाक मकानों को गिराया जा रहा है। हर साल हम नोटिस भी जारी करते हैं। इस बार भी मकानों के खतरनाक हिस्से हटाए जाएंगे।
300 से ज्यादा का स्टाॅफ खतरनाक भवन में
नगर निगम मुख्यालय की 40 साल पहले बनी बिल्डिंग में संपत्तिकर और जलकर विभाग संचालित हो रहा है। कुछ समय पहले दूसरी मंजिल की सीढियों का हिस्सा गिर पड़ा। इसके बाद छत पर जाने का रास्ता रोक दिया गया, लेकिन पहली व दूसरी मंजिल पर 300 से ज्यादा कर्मचारियों का स्टाॅफ रोज बैठता है। इस बिल्डिंग की गैलरी की छत का एक हिस्सा टूट चुका है। पिलरों में भी दरारें आ गई हैं।
जनता क्वार्टस के मकान भी खतरनाक
उधर, हाऊसिंग बोर्ड की जनता क्वार्टर्स के मकान भी खतरनाक श्रेणी में है, लेकिन उनका सर्वे ही नहीं हुआ है। ये मकान 40 साल से ज्यादा पुराने हैं। उनका रखरखाव भी नहीं किया जा रहा है। इंदौर विकास प्राधिकरण के विजय नगर क्षेत्र के मांगलिक भवन के पास बने मकान भी खतरनाक हो चुके हैं, लेकिन उन्हें भी नहीं हटाया जा रहा है।