झाबुआ-रतलाम लोकसभा सीट प्रदेश के आदिवासी वोटरों का मिजाज चुनाव में बताती है। आजादी के बाद के ज्यादातर वर्षों में कांग्रेस ने इस सीट पर राज किया, लेकिन अब भाजपा की जमीन भी यहां तैयार हो चुकी है। इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को अपने परंपरागत वोटबैंक पर भरोसा है, लेकिन 40 साल बाद भाजपा ने आलीराजपुर क्षेत्र से टिकट देकर क्षेत्रीय समीकरणों को साधने की कोशिश की है और महिला उम्मीदवार को टिकट देने का प्रयोग भी किया है। अब देखना है कि भाजपा के यह दोनो प्रयोग क्या रंग लाते है।
कांग्रेस का गढ़ रही है झाबुआ सीट
17 लोकसभा चुनाव और एक उपचुनाव में चार बार ही रतलाम झाबुआ सीट से गैर कांग्रेसी उम्मीदवार जीते है। जनसंघ और भाजपा के लिए यह सीट हमेशा चुनौति रही है। दिलीप सिंह भूरिया सबसे ज्यादा सात बार कांग्रेस के सांसद रहे। फिर वर्ष 2014 में दिलीप सिंह भूरिया भाजपा में आए और चुनाव जीते, लेकिन उनके निधन के कारण उपचुनाव हुआ और कांग्रेस ने उपचुनाव में जीत दर्ज कराई। 2019 में डामोर ने फिर यह सीट कांग्रेस से छिनी ली।
तीसरी बार महिला उम्मीदवार का प्रयोग
इस सीट पर अभी तक तीन बार महिला उम्मीदवार को राजनीतिक दलों ने टिकट दिया है। कांग्रेस ने 1962 में पहली बार महिला प्रत्याशी को मैदान में उतारा था। तब जमुनादेवी चुनाव जीती थी। तब यह सीट चर्चा में आई थी। इस सीट पर 1962 में टिकट बदलते हुए अमर सिंह के स्थान पर जमुना देवी को उम्मीदवार बनाया था। 2004 में दिलीप सिंह भूरिया के बजाए रेलम सिंह चौहान को टिकट दिया, लेकिन वे चुनाव नहीं जीत पाई। अब भाजपा ने फिर महिला को टिकट दिया है।