इंदौर के जीवनरेखा कहे जाने वाले एमजी रोड पर स्थित शास्त्री ब्रिज शहर के मध्य और पूर्वी क्षेत्र को जोड़ता है। 70 साल से अधिक पुराने इस ब्रिज के कई हिस्से कमजोर हो चुके हैं। पिछले दिनों ब्रिज का एक हिस्सा धंस गया था। इसके अलावा कई जगहों पर प्लास्टर भी उखड़ चुका है।
नए रेलवे स्टेशन के निर्माण और विस्तार की योजना के तहत स्टेशन का विस्तार मौजूदा शास्त्री ब्रिज तक किया जाना है। इस कारण पुराने ब्रिज को तोड़ना पड़ेगा। हालांकि, एमजी रोड शहर के प्रमुख मार्गों में शामिल है, इसलिए यहां लंबा डायवर्जन देना संभव नहीं है। इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पहले पुराने ब्रिज के पास नया ब्रिज बनाने का फैसला लिया है। नया ब्रिज तैयार होने के बाद ही पुराने ब्रिज को तोड़ा जाएगा।
पहले शास्त्री ब्रिज छह लेन का था, लेकिन अब नया ब्रिज चार लेन का बनाया जाएगा। रेलवे ने इसके निर्माण के लिए डेढ़ साल की समयसीमा तय की है। पुराने ब्रिज की लंबाई करीब 400 मीटर है, जबकि नया ब्रिज 438 मीटर लंबा होगा। लंबाई में बदलाव के कारण रीगल तिराहे को भी नए सिरे से डिजाइन करना होगा।
सात मीटर ऊंचा होगा ब्रिज
नए ब्रिज की जमीन से ऊंचाई सात मीटर रखी जाएगी, ताकि रेलवे स्टेशन के विस्तार में किसी तरह की परेशानी न आए। ब्रिज के नीचे से ट्रेनों का आवागमन भी होगा। इसके लिए ब्रिज की डिजाइन वायाडक्ट आधारित रखी जाएगी।
निर्माण कार्य शुरू करने से पहले मौजूदा सीवर लाइन को स्थानांतरित किया जाएगा और नई सीवर लाइनें बिछाई जाएंगी, ताकि जल निकासी व्यवस्था बाधित न हो। इसके अलावा बिजली के खंभों और स्ट्रीट लाइटों को भी स्थानांतरित या बदला जाएगा। ब्रिज के दोनों ओर सर्विस रोड भी बनाई जाएगी।
दो माह पहले रेलवे के अधिकारियों ने पुराने शास्त्री ब्रिज का निरीक्षण किया था। ब्रिज की मौजूदा स्थिति और रेलवे स्टेशन के प्रस्तावित विस्तार को देखते हुए नए ब्रिज का निर्माण आवश्यक माना जा रहा है। नए ब्रिज के बनने से यातायात व्यवस्था बनाए रखते हुए पुराने ब्रिज को हटाने और स्टेशन विस्तार का काम आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।