भगवान परशुराम की जन्मस्थली को लेकर संशय अक्सर रहा है। वे कहां जन्मे, उसका उल्लेख पुराणों मे भी स्पष्ट नहीं है। इंदौर के समीप महू में मानपुर की जानापाव पहाड़ी को भगवान परशुराम की जन्मस्थली मानकर मध्य प्रदेश सरकार ने पांच करोड़ से अधिक की राशि खर्च की है। वहां परशुराम लोक भी बनाया जा रहा है। लेकिन, हाल ही में उत्तर प्रदेश सरकार ने यूपी के शाहजहांपुर के कस्बे जलालाबाद का नाम बदलकर परशुरामपुरी किया है। इस कस्बे को भी परशुराम की जन्मस्थली माना जाता है। वहां परशुराम का मंदिर भी है, जो सैकड़ों साल पुराना है।
बता दें, यूपी के जलालाबाद कस्बे का नाम कई वर्षों से परशुरामपुरी करने की मांग उठ रही थी। नाम बदले जाने को लेकर पिछले दिनों यूपी सरकार ने अधिसूचना जारी की है। इसके पूर्व इस कस्बे का नाम मुगल बादशाह जलालुद्दीन के नाम पर था।
जानापाव को माना जाता है जन्मस्थली
इधर, महू के समीप आगरा-मुंबई हाईवे पर 854 मीटर की ऊंचाई पर स्थित जानापाव पहाड़ी को मध्य प्रदेश सरकार ने एक धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया है। यह पहाड़ी सात नदियों का उद्गम स्थल भी है। यहां एक प्राचीन शिव मंदिर भी है। इस पहाड़ी को लेकर लेकर कहा जाता है कि भगवान परशुराम का जन्म इसी जगह हुआ था।
परशुराम लोक बना रही मप्र सरकार
जानापाव को परशुराम लोक के रूप में विकसित करने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने 10 करोड़ रुपये की योजना बनाई है। यहां कुछ मूर्तियां भी लगाई हैं। कुंड का विकास, ध्यान केंद्र, हर्बल गार्डन, फेंसिंग के अलावा अन्य कई काम यहां हो रहे हैं। हर साल अक्षय तृतीया पर परशुराम जयंती के दिन जानापाव में आयोजन भी होते हैं। पंडित रामचंद्र शर्मा वैदिक कहते हैं कि परशुराम के जन्म को लेकर अलग-अलग मत है। जानापाव उनका जन्मस्थल माना जाता है, लेकिन गुजरात के सोमनाथ को भी उनका जन्म स्थान कहा जाता है। इसके अलावा यूपी के जलालाबाद को भी उनका जन्मस्थान बताया जा रहा है।