इंदौर के सहकारिता जगत में कुछ संस्थाएं अपने विश्वास और साख के दम पर वर्षों से टिकी हुई हैं। इंदौर की छत्रपति शिवाजी सहकारी संस्था के 50 वर्ष पूरे हो चुके हैं। संस्था ने शनिवार को अपना स्थापना दिवस मनाया। पचास साल पहले इंदौर के समाजसेवी तु.सी आमणापुरकर और वासुदेव राव चौखंडे ने 1974 में तिलकपथ के एक कमरे से इस संस्था की शुरुआत की थी। अब यह संस्था एक हरा भरा सहकारिता का पेड़ बन चुकी है। संस्था के पास अब खुद के दो भवन है। जिसमें दो शाखाएं संचालित होती हैं, जबकि मुख्यालय तिलकपथ पर ही है।
संस्था अध्यक्ष प्रभाकर चौखंडे ने बताया कि संस्था के 7000 सदस्य हैं। संस्था का वार्षिक टर्नओवर 186 करोड़ रुपये है। संस्था ने अपनी कुटुंब सहायता राशि में किसी तरह की कमी नहीं की है। दिवंगत सदस्यों के वारिसों को 1.60 लाख रुपये की राशि दी जाती है। सदस्यों ने करोड़ों रुपये की एफडी संस्था में कराई है। उन्हें बैंकों की तुलना में ज्यादा ब्याज देने का हमारा प्रयास रहता है। छोटे कर्ज देकर कई परिवारों को रोजगार भी संस्था ने प्रदान किए हैं।
नहीं डगमगाया सदस्यों का विश्वास
इंदौर में एक दौर आया, जब वर्षों पुरानी सहकारी संस्थाएं बंद हो गईं। फैली अफवाहों के कारण सदस्यों ने संस्था में जमा की गई पूंजी निकालना शुरू कर दी, लेकिन उस दौर में भी छत्रपति शिवाजी संस्था के प्रति सदस्यों का विश्वास कायम रहा। सदस्यों के मेधावी बच्चों के लिए संस्था हर साल छात्रवृत्ति भी बांटती है। चार से पांच लाख रुपये उनकी पढ़ाई पर खर्च किया जाता है। शनिवार को संस्था का स्वर्ण जयंती कार्यक्रम रवींद्र नाट्यगृह में आयोजित किया गया। इसमें वरिष्ठ सदस्यों का सम्मान किया गया।